जब शरीर के किसी बाहरी एवं अंदरूनी अंगों का आकार फैलने तथा बढ़ने लगे तो यह उस हिस्से में सूजन का रूप ले लेता है। जिसे चिकित्सकीय भाषा में एडिमा बीमारी या ड्रॉप्सी कहा जाता है। आमतौर पर सूजन कि जगह पर द्रव के एकत्रित होने की वजह से होती है। यह जलन चोट और दर्द की वजह से भी हो सकती है।

सूजन शरीर के बाहरी त्वचा तथा अंदरूनी हिस्सों को भी प्रभावित कर सकता है। लेकिन ऐसी कई स्थितियां हैं जो सूजन का कारण बन सकती है। जैसे कीटो का काटना, चोट या अन्य प्रकार की कोई बीमारी की वजह से शरीर में सूजन हो सकती है।

शरीर के अंदरूनी हिस्सों में सूजन का कारण दवाइयों का साइड इफेक्ट भी माना गया है, यदि आपको अपने शरीर में सूजन लगातार महसूस हो रहा है, तो तुरंत आपको डॉक्टर से दिखाना चाहिए। खासकर सूजन होने की वजह से असामान्य रूप से वजन बढ़ता है और अत्यधिक दर्द होता है। ऐसी स्थिति होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए

ड्रॉप्सी (एडिमा) कितने प्रकार के हो सकते है? (Dopsy edema kitne parkar ke ho sakte hai?)

  1. पेरिफेरल एडिमा ( Peripheral edema)- मुख्य रूप से या पैरों व टखनों को प्रभावित करते हैं, लेकिन कभी-कभी यह बाजुओं में भी हो सकता है। यह सूजन की सबसे आम समस्याओं में से एक है,जो संचार प्रणाली, लिम्फ नोड्स, और गुर्दों में समस्या इनके मुख्य कारण है।

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  2. पीडल एडिमा (Pedal edema)- पीडल एडिमा की समस्या तब होती है जब टांगों के निचले हिस्से में द्रव इकठ्ठा हो जाता है। बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं में पीडल एडिमा का होना एक आम समस्या है लेकिन पीडल एडिमा से ग्रसित हिस्से को काफी समस्याएं उत्पन्न होती है। ऐसी स्थिति में हो सकता है कि आपके पैर सुन्न हो जाए।

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  3. पलमॉनेरी एडिमा (Pulmonary edema)- पलमॉनेरी एडिमा होने की स्थिति में द्रव्य फेफड़ों में मौजूद हवा की थैली में इकट्ठा हो जाते हैं तो पलमॉनेरी एडिमा विकसित हो जाते है। जो सांस लेने में कठिनाई उत्पन्न कर सकता है। साथ ही सोने में परेशानी होती है, ऐसी स्थिति में दिल की धड़कन तेज हो जाती हैं और घुटन महसूस होती है पलमॉनेरी एडिमा में थूकने के वक्त थूक से खून भी निकल सकता है।

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  4. लिंफेडिमा (Lymphedema)- बाजू और पैरों में लगातार सूजन बने रहना लिम्फ नोड्स को क्षति पहुंचाने की वजह से हो सकते है कई बार ये उन उत्तक को क्षति पहुंचा सकते हैं। जो जीवाणुओं और अनावश्यक पदार्थ को फिल्टर करने में हमारी मदद करते है। लिंफेडिमा होने का कारण चोट, या कैंसर के दौरान होने वाली रेडिएशन थेरेपी भी हो सकती है।

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  5. मैक्यूलर एडिमा (Macular edama)- मैक्यूलर एडिमा की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब रेटिना में स्थित क्षतिग्रस्त रक्त वाहिकाओं में द्रव्य इकट्ठा होकर रिसने लगता है।

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  6. मस्तिष्क एडिमा (Cerebral edama)- यह एडिमा की सबसे गंभीर स्थितियों में से एक है। इसमें द्रव्य मस्तिष्क में विकसित होने लगता है, जिसके वजह से दिमाग की रक्त वाहिका फट जाती हैं, अर्थात (ब्लॉक) हो जाती है जिसकी कारण ब्रेन ट्यूमर ,या फिर किसी प्रकार का एलर्जीक रिऐक्शन या सिर में गंभीर चोट लगना हो सकता है।

एडिमा बीमारी के क्या कारण हो सकते है? (Dropsy edama ka kya karan ho sakta hai? )

आमतौर पर लोग सूजन होने की स्थिति में तेल या बाम लगा कर इसे ठीक करने का प्रयास करते हैं। आपकी जानकारी के लिए यह बता दे, कि ऐसा करना आपको परेशानी में डाल सकता है कई बार समस्या होने की वजह से प्रभावित स्थान पर तरल पदार्थ भरने लगते है तभी शरीर में सूजन की समस्याएं उत्पन्न हो जाती है एडिमा होने की स्थिति में प्रभावित स्थान पर द्रव्य भरने लगता है, लेकिन एडिमा में होने वाले सूजन के कई कारण हो सकते हैं।

आमतौर पर हड्डियों ऊतकों ,मांसपेशियों और शरीर में लगी पुरानी चोट को संक्रमण से बचाने के लिए किए जाने वाले उपचार से त्वचा की ऊपरी हिस्सों में सूजन आ सकता है वैसे तो द्रव अंदरूनी हिस्सों में इकट्ठा होते हैं लेकिन इसकी वजह से बाहरी हिस्सों में सूजन उत्पन्न हो जाता है।

बाहरी हिस्सों में सूजन होने के कुछ निम्नलिखित कारण हो सकते हैं।

  1. किसी कीट का काटना
  2. शरीर में लाल चकत्ते पड़ना
  3. गंभीर चोट लगना
  4. गर्भावस्था के दौरान
  5. मासिक धर्म तथा हार्मोनल परिवर्तन के कारण
  6. संक्रमण की वजह से

शरीर के बाहरी हिस्सों में होने वाले सूजन तो ठीक भी हो सकते हैं लेकिन स्थिर सूजन वह स्थिति होती है जिस में सूजन सिर्फ प्रभावित स्थानों पर होती है उदाहरण के लिए यदि किसी व्यक्ति के आंख में किसी प्रकार की समस्या है तो सूजन उनकी आंखों के आसपास ही होती है यदि किसी व्यक्ति को कीट ने काटा है।

तो उस प्रभावित स्थान पर ही सूजन होगी जहां पर कीट ने डंक छोड़े है। फैलने वाले सूजन शरीर के एक बड़े हिस्से में फैल जाती है यह समस्या एक गंभीर बीमारी के होने का संकेत है आमतौर पर यह समस्या एलर्जीक रिएक्शन की वजह से होती है जिसमे सूजन पैदा करने के कारण शामिल हैं।

  1. किडनी फेलियर
  2. हार्ट फेलियर
  3. एनाफिलेकिसस गंभीर एलर्जी की समस्या
  4. जहरीले कीट का कटना

शुगर या कैंसर से ग्रसित मरीज के शरीर के बड़े हिस्से में सूजन या हाथ पैर की उंगलियों में सूजन महसूस कर सकते हैं सूजन का यह स्वरूप समय समय पर दिखाई देता है शरीर के अंदर सूजन का होना द्रव्य इकट्ठा होना तथा पेट का फूलना आदि परिणाम हो सकता है। सूजन का यह स्वरूप अंदरूनी रोग से ग्रसित मरीज को भी सकते है।

ड्रॉप्सी (एडिमा) का बचाव कैसे किया जाता है? ( Dropsy edema ka bachav kaise kiya jata hai)

यदि मरीज को पहले से किसी भी प्रकार की बीमारी सूजन की समस्या को पैदा कर रही है तो उस बीमारी का सुचारू रूप से इलाज करके सूजन को कम करने वाली दवाइयों को देकर उसका इलाज किया जा सकता है लेकिन किसी अंदरूनी अंग में सूजन की समस्या होने पर इस रोग से संबंधित डॉक्टर की सलाह के अनुसार उसे रोकने के लिए नियमित दवाओं का सेवन करना चाहिए।

मरीज के अंदरूनी सूजन को रोकने के लिए डॉक्टर उनके जीवन शैली में कुछ अहम बदलाव करने के लिए परामर्श देते है।

जैसे नमक का सेवन कम करना प्रभावित स्थान पर ज्यादा जोर ना देना, लेटते वक्त अपने पैर और हाथों को सीधा रखना आदि डॉक्टर मरीज के अंदरूनी एवं बाहरी सूजन को कम करने के लिए मरीज का शारीरिक जांच करते हैं साथ ही डॉक्टर मरीज से उनके पिछले चिकित्सा इतिहासों के बारे में भी पूछते हैं साथ ही कुछ मामलों में एक्स-रे अल्ट्रासाउंड, ब्लड टेस्ट और यूरिन की जांच करवाई जाती है।

ड्रॉप्सी (एडिमा) के उपचार क्या हो सकते है? (Dropsy edema ke upchar kya ho sakte hai?)

मुख्य रूप से एडिमा का उपचार उसके कारण पर निर्भर करता है लेकिन सामान्य तौर पर एडिमा की उपचार कुछ इस प्रकार हो सकते है।

  1. सूजन की आम समस्या होने पर कभी-कभार या अपने आप ही ठीक हो जाते हैं लेकिन इसके लिए प्रभावित क्षेत्र का उपचार सही तरीके से होना चाहिए।
  2. अत्यंत गंभीर प्रकार के सूजन को दवाइयों के माध्यम से ठीक किया जाता है दवाइयां शरीर के अंदरूनी हिस्से में जमे हुए द्रव्य को पेशाब के माध्यम से शरीर के बाहर निकाल देती हैं।
  3. बाहरी एवं अंदरूनी सूजन को कम करने के लिए डॉक्टर कुछ दवाइयों को लेने की सलाह देते हैं लेकिन बिना डॉक्टर के परामर्श अनुसार किसी भी प्रकार के दवाइयों का सेवन नहीं करना चाहिए।
  4. यदि शरीर में सूजन का कारण फोड़ा या किसी भी प्रकार का ट्यूमर है तो उसे निकालने में सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है।
  5. यदि लंबे समय तक चल रहे उपचार के बावजूद भी समस्याएं ठीक ना हो रहा हो तो डॉक्टर से इस विषय पर खुलकर बात करनी चाहिए। तभी डॉक्टर अन्य प्रकार के उपचार की सलाह देंगे।

ड्रॉप्सी (एडिमा) के लक्षण क्या हो सकते हैं? (Dropsy edema ke lakshan kya ho sakte hai?)

हल्की सूजन आप अपने शरीर में शायद ना भी महसूस करें क्योंकि उससे कुछ खास लक्षण पैदा नहीं होते हैं यदि शरीर में बाहरी सूजन हुआ है तो त्वचा और मांसपेशियों का आकार बढा हुआ दिखाई देता है लेकिन सूजन के कुछ अन्य लक्षण भी हैं जैसे सूजन से प्रभावित क्षेत्र में द्रव्य इकट्ठा होना इसका पता लगा पाना काफी कठिन होता है यदि आपको किसी अन्य बीमारी कीटों के काटने या फिर चोट लगने से सूजन की समस्या उत्पन्न हुई है तो आपको कुछ इस तरह के लक्षण का अनुभव हो सकता है।

  1. पेट का फूलना
  2. खुजली होने
  3. सूजन से प्रभावित क्षेत्र में दर्द महसूस होना
  4. उल्टी होना

स्कैनिंग की मदद से शरीर के अंदरूनी हिस्सों एवं मांसपेशियों और हड्डियों के बढ़े हुए आकार को देखा जा सकता है यदि इसके बाद भी सूजन स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रहा है तो हो सकता है कि शरीर में अंदरुनी सूजन हो तो उसके कुछ लक्षण आपको अनुभव हो सकते हैं जो कुछ इस प्रकार हैं।

  1. थकान
  2. बुखार
  3. चक्कर आना
  4. नींद की कमी
  5. प्रभावित स्थान पर दर्द होना

ड्रॉप्सी (एडिमा) को कम करने के घरेलू उपचार क्या है? (Dropsy edema ko kam karne ke gharelu upchar kya hai?)

शरीर में लगे किसी भी गंभीर चोट सूजन का कारण बन सकते हैं इसके अलावा शरीर का पूरी तरीके से फूलना भी सूजन कहलाता है आम तौर पर इसकी समस्या उत्तर को में पानी भर जाने की वजह से होता है यह शरीर के किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकती है इसका कारण गर्भावस्था और दवाओं का साइड इफेक्ट भी हो सकता है साथ ही एक जगह पर घंटों तक बैठना भी इसके प्रमुख कारणों में से एक हैं

आइए जानते हैं की किन-किन घरेलू चीजों का इस्तेमाल करके एडिमा के सूजन को कम किया जा सकता है। यदि आपको शरीर के किसी हिस्से में सूजन और फैलाव नजर आते है उंगलियों के दबने पर उस स्थान पर थोड़ी देर के लिए गड्ढे हो जाते हैं तो ऐसी स्थिति में आपको तुरंत डॉक्टर से दिखाना चाहिए।

ग्रीन टी (Green tea)

एडिमा बीमारी

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एडिमा के सूजन के दौरान ग्रीन टी का सेवन बेहद फायदेमंद होता है क्योंकि इसमें उत्तेजक और मूत्रवर्धक गुण पाए जाते हैं जो शरीर में मौजूद अतिरिक्त जल को पचाने में मदद मदद करता है साथ ही या शरीर की सूजन को कम करने के लिए बेहद ही असरकारक उपाय है यदि नियमित रूप से दिन में 2 से 3 बार ग्रीन टी का सेवन करते हैं तो जल्द ही एडिमा के सूजन से राहत मिलेगा।

अनानास का जूस (Pineapple juice)

अनानास में अत्यधिक मात्रा में ब्रोमलेन नामक यौगिक मौजूद होते हैं जिनमें सूजन को कम करने के गुण पाए जाते हैं साथ ही अनानास को एक प्राकृतिक मूत्रवर्धक के रूप में जाना जाता है। रोजाना दिन में कम से कम 1ग्लास अनानास के जूस का सेवन करना चाहिए।

मसाज थेरेपी (Message therapy)

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रोजाना 10 से 15 मिनट नारियल तेल से मसाज करने पर रक्त प्रवाह में सुधार आता है जिससे सूजन को कम करने में मदद मिलती है।

हल्दी (Turmeric)

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एंटीऑक्सीडेंट और एंटीइनफ्लमेटरी गुणों से भरपूर हल्दी वाला दूध मुक्त रैडिकल्स से लड़ने वाले ऐन्टी-ऑक्सीडेन्ट का बेहतरीन स्रोत होता है। साथ ही शरीर के किसी भी स्‍थान की सूजन के साथ दर्द और जलन भी हो तो हल्‍दी के पेस्‍ट को प्रभावित जगहों पर लगाने से इन तकलीफों से निजात मिलता है।

सेब का सिरका (Apple cider vinegar)

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सेब के सिरके के सेवन से अनेकों स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं सेब के सिरके में पोटेशियम की मात्रा अधिक पाई जाती है साथ ही इनमें सूजन को कम करने के गुण भी मौजूद होते हैं इसका नियमित रूप से पूरे दिन में दो बार सेवन करना चाहिए।

विटामिंस (vitamins)

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यदि आप विटामिन A, C, E आहार या सप्लीमेंट के माध्यम से लेते हैं तो यह शरीर में सूजन को कम करने में लाभदायक होते हैं।

ड्रॉप्सी (एडिमा) से संबंधित कुछ प्रश्न एवं उसके उत्तर

 सूजन के शुरुआती लक्षण क्या हो सकते हैं?

आमतौर पर एडिमा के सूजन जल्दी पता नहीं चल पाते हैं लेकिन मांसपेशियों का आकार बड़ा हुआ नजर आता है और प्रभावित स्थान पर खुजली और दर्द महसूस होता ।

 सूजन का परीक्षण कैसे किया जाता है?

सूजन के कारण को पता लगाने के लिए डॉक्टर मरीज का शारीरिक परीक्षण करते हैं और उनसे उनके पुराने चिकित्सा इतिहास के बारे में भी पूछते हैं साथ ही उन्हें कुछ जांच कराने का भी आदेश देते हैं जैसे एक्स-रे अल्ट्रासाउंड ब्लड टेस्ट,यूरिन टेस्ट आदि।

सूजन का इलाज कैसे किया जाता है?

सूजन का इलाज उसके कारण एवं उसकी स्थिति पर निर्भर करता है।

पल्मोनरी एडिमा क्या है?

यदि आप को सांस लेने में परेशानी हो रही है और छाती में तेज दर्द हो रहा है खांसी के साथ खून निकलता है तो यह सभी लक्षण पल्मोनरी एडिमा के हो सकते है इस बीमारी के होने की स्थिति में फेफड़ों के अंदर पानी भर जाता है जिसकी वजह से मरीज को सांस लेने में तकलीफ होती है।

 एडिमा होने का क्या कारण हो सकता है?

ज्यादातर मामलों में अस्वस्थ जीवनशैली असंतुलित आहार एवं शारीरिक मेहनत करने से बचना एडिमा का कारण हो सकता है।

हमने आपको अपने इस आर्टिकल के माध्यम से ड्रॉप्सी अर्थात एडिमा के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी देने की कोशिश की है साथ ही हमने आपको ड्रॉप्सी के प्रकारों के विषय बताया है कि यह 6 प्रकार के होते हैं जिनके लक्षण भिन्न-भिन्न होते हैं जैसे पीडल एडिमा, पल्मोनरी एडिमा, लिंफेडिमा, मैक्यूलर एडिमा, और मस्तिष्क एडिमा, हमने आपको यह भी बताया है कि यह किन किन कारणों से हो सकता है।

साथ ही हमने आपको एडिमा के लक्षण बचाव तथा उपचार के बारे में भी जानकारी दी है ड्रॉप्सी को नियंत्रित करने के कुछ घरेलू उपाय भी हमने आपको बताया है।

हमें उम्मीद है ड्रॉप्सी (एडिमा) पर लिखा हुआ यह लेख पसंद आया होगा यदि इस लेख से संबंधित आपके मन में कोई प्रश्न उत्पन्न हो रहा है तो आप नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में कमेंट करके हमें बताएं हम आपकी सेवा में सदैव तत्पर है।

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