उच्च रक्तचाप यानी हाई ब्लड प्रेशर की समस्या तब होती है जब आपके ब्लड प्रेशर का स्तर बढ़ जाता है आपके ब्लड प्रेशर को कम आपके इस बात को ध्यान में रखकर किया जाता है, कि आपके रक्त वाहिकाओं से कितना रक्त गुजर रहा है, और दिल को पंप करते वक्त रक्त कितनी मात्रा में प्राप्त होता है।
पतली धमनिया को बढ़ावा देती हैं, ऐसे में आपकी धमनिया जितनी पतली होंगी आपका ब्लड प्रेशर उतना ही अधिक होगा काफी लंबे समय तक बढ़ा हुआ दबाव हृदय रोग के साथ-साथ अन्य स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं का कारण बन सकता है।
उच्च रक्तचाप का होना एक सामान्य बात है, हाई ब्लड प्रेशर आमतौर पर कई वर्षों बाद विकसित होते हैं, यही कारण है कि आपको इसके लक्षण जल्द नजर नहीं आते है। लेकिन लक्षणों का पता चले बिना भी ब्लड प्रेशर आपके रक्त वाहिकाओं और अन्य अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। मुख्य रूप से यह मस्तिष्क हृदय, आंख और किडनी को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
आपके लिए शुरुआती लक्षणों में इसका पहचान करना बेहद जरूरी है, नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की रीडिंग आपको और आपके डॉक्टर को किसी भी प्रकार के बदलाव को नोटिस करने में आपकी मदद कर सकते हैं।
ऐसे में यदि आपका ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है, तो हो सकता है कि डॉक्टर कुछ हफ्तों तक आपके ब्लड प्रेशर की जांच कर यह जान सकते हैं कि आपके ब्लड प्रेशर का लेवल बढ़ा हुआ है, या फिर घट रहा है।
उच्च रक्तचाप के उपचार के लिए डॉक्टर के पर्चे पर दी गई दवाइयां और अन हेल्थी लाइफस्टाइल दोनों ही मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं। यदि स्थिति का इलाज सही समय पर नहीं किया जाता है, तो यह दिल का दौरा स्ट्रोक सहित अन्य प्रकार के स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं को जन्म दे सकते हैं।
हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण क्या हो सकते हैं? (High blood pressure ke lakshan kya ho sakte hai?)

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उच्च रक्तचाप का होना एक सामान्य स्थिति है, बहुत से लोगों ने इसके लक्षणों का अनुभव कभी ना कभी तो किया ही होगा उच्च रक्तचाप की स्थिति को गंभीर स्तर तक पहुंचाने के लिए कई सालों का समय लग सकता है। जिस भी व्यक्ति को इसके लक्षण स्पष्ट हो जाते हैं, लेकिन फिर भी इन लक्षणों के लिए अन्य मुद्दों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
उच्च रक्तचाप के लक्षणों में शामिल हो सकते हैं
- सिर दर्द
- सांस को लेने में समस्या
- नाक से खून आना
- जल्दी-जल्दी आंखों का झपकना तथा कम दिखाई देना।
- सिर चकराना, छाती में तेज दर्द होना, तथा पेशाब में खून आना जैसे लक्षण शामिल हो सकते हैं।
यदि यह सभी लक्षण आपको नजर आ रहे हैं, तो आपको तत्काल ही उपचार की आवश्यकता है। ऐसा भी संभव है कि ये सभी लक्षण हाई ब्लड प्रेशर के ना हो लेकिन स्थिति के लक्षणों का इंतजार करना आपकी सेहत के लिए गंभीर हो सकता है।
ऐसे में यदि उच्च रक्तचाप है, तो इसकी जानकारी प्राप्त करने के लिए सबसे सटीक तरीका है। आप नियमित रूप से हाई ब्लड प्रेशर की रीडिंग लें यही कारण है कि ज्यादातर डॉक्टर अपने मरीज का सबसे पहले हाई ब्लड प्रेशर की रीडिंग लेते हैं। यदि आप वर्ष में सिर्फ एक बार शारीरिक जांच (physical test) करवाते हैं, तो हाई ब्लड प्रेशर के जोखिम ओं के बारे में अपने डॉक्टर से बात करना बेहद जरूरी है।
डॉक्टर आपको कुछ कुछ दिनों के अंतराल पर हाई ब्लड प्रेशर की जांच तथा रीडिंग करवाने की सलाह दे सकते हैं। उदाहरण के लिए (For example) यदि आपके परिवार में कोई पुराना हृदय रोग का इतिहास रहा है, तो डॉक्टर आपको ब्लड प्रेशर की जांच कम से कम वर्ष में दो बार करवाने की सलाह देते हैं। ऐसा करने से आपके समस्याओं का पता आसानी से लगाया जा सकता है।
हाई ब्लड प्रेशर के कारण क्या हो सकते हैं? (High blood pressure ke karan kya ho sakte hai?)

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आमतौर पर हाई ब्लड प्रेशर के दो प्रकार होते हैं, लेकिन प्रत्येक प्रकार के अपने अलग-अलग कारण होते हैं।
प्राथमिक उच्च रक्तचाप (Primary hypertension) प्राथमिक यानि ( Primary hypertension) को आवश्यक हाई ब्लड प्रेशर भी कहा जाता है। इस प्रकार का हाई ब्लड प्रेशर बिना किसी पहचान और कारण के समय के साथ विकसित होता रहता है। हममें से ज्यादातर लोगों को इस तरह के हाई ब्लड प्रेशर की समस्या होती है।
शोधकर्ताओं को अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि ऐसा कौन सा कारण है जिसकी वजह से हाई ब्लड प्रेशर धीरे-धीरे बढ़ता रहता है लेकिन कुछ कारण है जो हाई ब्लड प्रेशर को बढ़ाने में एक अहम भूमिका निभा सकते हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं।
- जीन: कुछ लोग अनुवांशिक रूप से हाई ब्लड प्रेशर के शिकार हो सकते हैं। इसका कारण आपको आपके माता-पिता से विरासत में मिली जिनमें परिवर्तन या अनुवांशिक असमानताओं के वजह से हो सकता है।
- शारीरिक परिवर्तन: यह आमतौर पर तब होता है जब आपके शरीर में कुछ बदलाव होते हैं। तभी आप अपने पूरे शरीर में उच्च रक्तचाप के लक्षणों का अनुभव करना शुरू कर देते हैं, उच्च रक्तचाप एक हो सकते हैं की उम्र बढ़ने के साथ-साथ किडनी के कार्य करने की क्षमता में आया परिवर्तन शरीर में सोडियम और तरल पदार्थ का प्राकृतिक संतुलन बिगाड़ देता है। परिणाम स्वरूप शरीर में आया बदलाव ब्लड प्रेशर के लेवल को बढ़ा देता है।
- पर्यावरण: समय के साथ-साथ शारीरिक गतिविधियों में आई अचानक से कमी, खराब आहार, अस्वास्थ्यकर लाइफस्टाइल को अपनाने से आपका वजन बढ़ जाता है, जिसकी वजह से आप मोटापे का शिकार हो जाते हैं, ऐसी स्थिति में हाई ब्लड प्रेशर का होना स्वाभाविक सी बात है।
- माध्यमिक उच्च रक्तचाप (Secondary hypertension) प्राथमिक उच्च रक्तचाप की अपेक्षा माध्यमिक उच्च रक्तचाप के असर अधिक तेजी से और जल्द ही नजर आने लगते हैं यह प्राथमिक रक्तचाप से अधिक घातक हो सकते हैं।
- माध्यमिक उच्च रक्तचाप यानि (Secondary hypertension) के कारण होने वाली स्थितियों में शामिल हैं।
- किडनी से जुड़ी बीमारियां
- नींद से जुड़ी समस्या
- अत्यधिक बढ़ा हुआ थायराइड
- दवाइयों के साइड इफेक्ट
- अवैध दवाइयों का सेवन
- अत्यधिक शराब और धूम्रपान का सेवन करना
- एड्रेनल ग्लैंड में दिक्कत
हाई ब्लड प्रेशर के बचाव क्या हो सकते हैं? (High blood pressure ke bachav kya ho sakte hai)
उच्च रक्तचाप के बचाव के लिए रक्तचाप रीडिंग लेना जितना आसान है। ज्यादातर डॉक्टर मरीजों को देखने से पहले उनके ब्लड प्रेशर की जांच करते हैं ऐसे में अगर उनके ब्लड प्रेशर की जांच नहीं की जाती है, तो आप डॉक्टरों से अनुरोध कर सकते हैं।
यदि आपका ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है, तो डॉक्टर आपसे अनुरोध कर सकते हैं कि कुछ दिनों और सप्ताह तक आपको प्रतिदिन ब्लड प्रेशर की रीडिंग लेने की आवश्यकता है। ऐसा करने से आपके बड़े हुए ब्लड प्रेशर को कम किया जा सकता है, आपके आसपास का वातावरण भी आपके ब्लड प्रेशर को बढ़ाने में योगदान दे सकता है। तो बेहतर होगा कि अपने आसपास एवं घरों के वातावरण को अपने स्वास्थ्य के अनुकूल रखने की कोशिश करें।
यदि आपका ब्लड प्रेशर जांचने के बाद भी बढ़ा रहता है तो इस स्थिति से निपटने के लिए डॉक्टर आपको कुछ जांच को करवाने की सलाह दे सकते हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं।
- यूरिन टेस्ट
- कोलेस्ट्रोल तथा रक्त की जांच
- इलेक्ट्रोकॉर्डियोग्राम जिसे ईसीजी के रूप में भी जाना जाता है।
- आपकी ह्रदय और किडनी की जांच की भी सलाह दे सकते हैं।
- इसके अलावा आपके ह्रदय और गुर्दे का भी अल्ट्रासाउंड करवाने को बोल सकते हैं।
यह सभी जांच आपके डॉक्टर को हाई ब्लड प्रेशर के कारण और सेकेंडरी ब्लड प्रेशर की पहचान कराने में आपकी मदद कर सकते हैं। यह शरीर में उन प्रभाव को भी देख सकते हैं जिसकी वजह से आपको हाई ब्लड प्रेशर का सामना करना पड़ा हो, यदि समय रहते ही आप अपने डॉक्टर से संपर्क करते हैं तो स्थाई नुकसान के खतरे को कम किया जा सकता है।
हाई ब्लड प्रेशर के रीडिंग को समझने का आसान तरीका क्या हो सकता है? (High blood pressure ke reading ko samajhne ka aasan tarika kya hai?)

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दरअसल ब्लड प्रेशर को दो मूल रूप में बताया जाता है, सिस्टोलिक प्रेशर तथा डायस्टोलिक प्रेशर, सिस्टोलिक तथा डास्टोलिक प्रेशर किसे कहते है?
जब हमारा हृदय पंप करता है, तो इस प्रक्रिया के दौरान हमारा हृदय सिकुड़ता तथा फैलता रहता है दिल धड़कने की एक चरण में जब दिल सिकुड़ता है और धमनियों में ब्लड को पंप करता है तो उस प्रक्रिया को सिस्टोलिक प्रक्रिया कहा जाता है।
अर्थात रिलेक्स करता है इसके अलावा चैंबर्स को रक्त से भरने की अनुमति देता है तो उसे डायस्टोलिक प्रेशर कहा जाता है।
- सिस्टोलिक प्रेशर- 120mm Hg है
- डायस्टोलिक प्रेशर- 80mm Hg है
यही कारण है कि नार्मल ब्लड प्रेशर 120/80 होता है, लेकिन यह व्यक्ति के उम्र और वजन के हिसाब से अलग-अलग हो सकते हैं।
हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के घरेलू उपचार क्या हो सकते है? ( High blood pressure ko niyantrit karne ke gharelu upchar kya hai?)

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स्वस्थ लाइफस्टाइल को अपनाकर आप हाई ब्लड प्रेशर के कारणों को नियंत्रित कर सकते हैं, यहां पर हमने आपको कुछ घरेलू उपाय बताए हैं जिनकी मदद से आप हाई ब्लड प्रेशर को कम कर सकते हैं।
उच्च रक्तचाप को कम करने के लिए स्वस्थ एवं संतुलित आहार को लेना बेहद जरूरी है, यदि आप अपने हाई ब्लड प्रेशर हो नियंत्रित रखना चाहते हैं, तो इन आहार का सेवन करना आवश्यक है। क्योंकि यह ब्लड प्रेशर के जोखिम को कम करता है, जिनमे स्ट्रोक हृदयाघात जैसे जोखिम शामिल हैं। हृदय को स्वस्थ रखने के लिए आप इन आहार का चुनाव कर सकते हैं।
- फल
- हरी और पत्तेदार सब्जियां
- साबुत अनाज
- मछली
- प्रोटीन
- शारीरिक गतिविधियों को बढ़ाने की कोशिश करें सही वजन को पाने के लिए शारीरिक रूप से सक्रिय होना बेहद जरूरी है, ऐसे में शारीरिक गतिविधियां आपके वजन को कम करने में आपकी मदद करेंगी। इसके अलावा आप नियमित रूप से व्यायाम, रनिंग तथा कार्डियो कर सकते हैं।
- नियमित रूप से व्यायाम करने पर तनाव कम होता है, जिसके परिणाम स्वरूप आपके हृदय की कार्यप्रणाली संतुलित रहती है आपको नियमित रूप से कम से कम 20 से 30 मिनट रोजाना शारीरिक गतिविधियां करनी चाहिए।
- अपने वजन को कम करने की कोशिश करें यदि आप अधिक वजन तथा मोटापे से ग्रसित हैं, तो व्यायाम तथा स्वस्थ आहार की मदद से अपने वजन को कम करने की कोशिश करें शारीरिक रूप से गतिविधियां करना आपके रक्तचाप को कम करने में मदद करता है।
- तनाव को दूर करने की कोशिश करें नियमित एक्सरसाइज करना तनाव को दूर करने का सबसे सटीक तरीका माना गया है, इसके अलावा अन्य गतिविधियां भी सहायक हो सकती हैं।
- मेडिटेशन
- गहरी और लंबी सांस लेना
- मसाज लेना
- योग करना
- इन सभी तरीकों को अपनाकर आप तनाव को कम कर सकते हैं, इसके अलावा आपको कम से कम रात के वक्त 7 से 8 घंटे की नींद लेना बेहद जरूरी है यह भी तनाव को कम करने का एक उपाय है।
- अच्छी लाइफ स्टाइल को फॉलो करें यदि आप नियमित रूप से धूम्रपान करते हैं, तो उसे जल्द से जल्द छोड़ने की कोशिश करें क्योंकि तंबाकू में मौजूद रसायन आपके शरीर की ऊतकों बेहद ही गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं और रक्त वाहिकाओं की दीवार को भी मोटी कर सकते हैं, जिसके वजह से आपको सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। यदि आप नियमित शराब का भी सेवन करते हैं तो उसे भी छोड़ने की कोशिश करें क्योंकि अत्यधिक शराब का सेवन ब्लड प्रेशर के स्तर को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है।
हाई ब्लड प्रेशर से ग्रसित लोगों को क्या खाना चाहिए? (High blood pressure se grasit logo ko kya khana chahiye?)
आप सबसे आसान तरीकों से उच्च रक्तचाप का इलाज कर सकते हैं, ऐसे में आप आहार के माध्यम से हाई ब्लड प्रेशर से संबंधित जटिलताओं को रोक सकते हैं।
आप जो कुछ भी खाते हैं वह उच्च रक्तचाप को कम तथा समाप्त करने की दिशा में एक अहम भूमिका निभाता है इसलिए यदि आप उच्च रक्तचाप के मरीज हैं तो अपने आहार का चुनाव ध्यान से करने की कोशिश करें।
उच्च रक्तचाप वाले लोगों के लिए यहां कुछ आहार की जानकारी दी गई है
हरी सब्जियां (Green vegetable)
हरी सब्जियों में फाइबर की मात्रा बढ़ाने सोडियम और संतृप्त वसा को कम करने का एक आसान उपाय है। ऐसे में आप डेयरी उत्पाद और मांस की जगह नियमित रूप से हरी सब्जियों का सेवन करें आप चाहे तो मछली और टोफू कम प्रोटीन वाले आहार का भी चुनाव कर सकते हैं।
आहार में सोडियम की मात्रा कम करें
उच्च रक्तचाप और हृदय रोग की समस्या से जूझ रहे लोगों को रोजाना 1500 मिलीग्राम से लेकर 2300 मिलीग्राम के बीच ही सोडियम का सेवन करने की आवश्यकता है। ऐसे में सोडियम की मात्रा को कम करने का सबसे अच्छा तरीका है, ताजे खाद्य पदार्थ को अधिक समय तक पकाना है, इसके अलावा पैक्ड फूड और बाहर के खानों को खाने से बचना चाहिए क्योंकि इसमें सोडियम की मात्रा अधिक पाई जाती है जो हृदय रोगियों और उच्च रक्तचाप रोगियों के लिए अच्छा नहीं माना जाता है।
सॉफ्ट ड्रिंक्स और मिठाइयों के सेवन से बचें
अत्यधिक मिठाइयां और सॉफ्ट ड्रिंक में सिर्फ कैलोरी की मात्रा अधिक पाई जाती है और इनमें किसी भी प्रकार के पोषक तत्व नहीं पाए जाते यदि फिर भी आप कुछ मीठा खाना चाहते हैं तो ताजे फल व शुगर फ्री चॉकलेट्स का सेवन कर सकते हैं।शोध में पाया गया है कि डार्क चॉकलेट का सेवन करने से हाई ब्लड प्रेशर की समस्या को कम किया जा सकता है।
गर्भावस्था के दौरान हाई ब्लड प्रेशर
हाई ब्लड प्रेशर से ग्रसित महिलाएं अपने बच्चे को जन्म तो दे सकती हैं, लेकिन यह महिला एवं बच्चें दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। यदि गर्भावस्था के दौरान अच्छे से निगरानी किया जाए तो स्थिति पर काबू पाया जा सकता है। क्योंकि हाई ब्लड प्रेशर से ग्रसित महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान समस्याएं हो सकती हैं।
उदाहरण के लिए गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला के किडनी की कार्य पर प्रभाव पड़ सकता है, इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर से ग्रसित महिला के जन्म दिए हुए बच्चे का वजन भी कम होने की संभावना रहती है, या बच्चा समय से पहले भी जन्म ले सकता है।
कुछ महिलाएं गर्भावस्था के दौरान हाई ब्लड प्रेशर का शिकार हो जाती है लेकिन बच्चे के जन्म के बाद स्थिति पर काबू पाया जा सकता है। हालांकि उसके बाद भी हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बना रहता है।
हाई ब्लड प्रेशर के साइड इफेक्ट क्या है? (High blood pressure Ke Side Effect kya hai?)
हाई ब्लड प्रेशर का होना एक सामान्य स्थिति है जिसकी वजह से इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते हैं। पहले तो यह आपके शरीर को वर्षों तक नुकसान पहुंचाते हैं। यदि समय रहते इसके लक्षणों को पकड़ इसका इलाज ना किया जाए तो यह आपके लिए बेहद ही घातक साबित हो सकता है।

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- धमनियां क्षतिग्रस्त हो जाती हैं पूर्णता स्वस्थ व्यक्ति की धमनियां लचीली व मजबूत होती हैं स्वस्थ धमनियों और वाहिकाओं के वजह से रक्त स्वतंत्र रूप से बहता है। हालांकि हाई ब्लड प्रेशर धमनियों को अत्यधिक सख्त बनाता है जिसकी वजह से आपके धमनियों में फैट एकत्रित होने लगता है और रक्त के प्रवाह में रुकावट आने लगती हैं परिणाम स्वरूप आपका ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। जिसकी वजह से स्ट्रोक और हार्ट अटैक की संभावनाएं बनी रहती हैं।
- हृदय क्षतिग्रस्त हो जाता है हाई ब्लड प्रेशर की वजह से आपके हृदय को अधिक मेहनत करने की आवश्यकता पड़ती है आपकी रक्त वाहिकाओं में पड़ने वाला दबाव आपकी हृदय की मांसपेशियों को अधिक बार पंप करने को मजबूर कर देता है परिणाम स्वरूप आपका हृदय कमजोर हो जाता है जिसकी वजह से आपको निम्न जोखिम ओं का सामना करना पड़ सकता है।
- ह्रदय गति का रुक जाना
- अचानक आये हृदयाघात से मृत्यु हो जाना
- हृदय की गति अचानक तेज या फिर धीमा हो जाना
- दिल का दौरा पड़ना
- मस्तिष्क को प्रभावित करना- आपकी मस्तिष्क को ठीक से काम करने के लिए स्वस्थ ऑक्सीजन युक्त रक्त की आवश्यकता पड़ती है ऐसे में हाई ब्लड प्रेशर आपके मस्तिष्क में रक्त की आपूर्ति को कम कर सकता है।
- मस्तिष्क में रक्त प्रभाव को स्थाई रूप से रोकने की स्थिति को क्षणिक इस्केमिक ( टीआईए ) कहा जाता है।
- मस्तिष्क में रक्त के का बहाव रुकने की वजह से मस्तिष्क की कोशिकाएं मर जाती हैं जिसे स्ट्रोक कहा जाता है।
- इसके अलावा अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर आपके सीखने याद करने, बोलने और तर्क करने की क्षमता पर भी प्रभाव डाल सकता है। हाई ब्लड प्रेशर का इलाज पूर्णता ठीक नहीं किया जा सकता लेकिन इसकी जोखिमओं को कम किया जा सकता है।
हाई ब्लड प्रेशर से संबंधित कुछ प्रश्न और उनके उत्तर
उच्च रक्तचाप क्यों होता है?
उच्च रक्तचाप यानी हाई ब्लड प्रेशर की समस्या का शुरुआती कारण है अत्यधिक चिंता, क्रोध, मानसिक विकार, तनाव अनियमित खानपान, कई बार आवश्यकता से अधिक खाना मैदे से बनी वस्तुओं का अधिक सेवन इसके अलावा पैक्ड फूड खाना जिन में सोडियम की मात्रा अधिक होती है।
शारीरिक गतिविधियों पर ध्यान ना देना उच्च रक्तचाप के मुख्य कारण हो सकते हैं।
क्या अल्कोहल लेने के बाद ब्लड प्रेशर हाई हो जाता है?
जी हां यह बात बिल्कुल सत्य है, कि अल्कोहल का सेवन करने के बाद ब्लड प्रेशर हाई हो जाता है। एक स्टडी के अनुसार यह पाया गया कि जो लोग शराब का सेवन नियमित रूप से करते हैं उनमें हाई ब्लड प्रेशर का खतरा ज्यादा रहता है, इसलिए शराब का सेवन ज्यादा करें या कम उसकी प्रभाव नकारात्मक ही आते हैं।
हाई ब्लड प्रेशर वाले मरीज को कैसे काम करना चाहिए?
जो भी व्यक्ति हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से ग्रसित हैं उन्हें अत्यधिक तनाव वाले कार्य से दूरी बनाना चाहिए लेकिन उन्हें अपने शारीरिक गतिविधियों को जारी रखना चाहिए अन्यथा उनके लिए नुकसानदायक हो सकता है।
190 हाई ब्लड प्रेशर होने पर क्या असर होगा?
190 mgh यह बेहद ही बड़ी संख्या है ऐसी स्थिति में मरीज को अपना बेहद ही अच्छे से ख्याल रखने की आवश्यकता है और जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करने की भी आवश्यकता है इसके अलावा डॉक्टर द्वारा बताए गए सुझाव को पालन करें।
हाई ब्लड प्रेशर वालों को कौन सा नमक खाना चाहिए?
हाई ब्लड प्रेशर से ग्रसित मरीज को सादा नमक खाने से बचना चाहिए क्योंकि इसमें सोडियम की मात्रा अधिक पाई जाती है ऐसे में उन्हें लो सोडियम नमक का सेवन करना चाहिए यह नमक उच्च रक्तचाप के मरीजों के लिए बेहद ही अच्छा माना जाता है।
हाई ब्लड प्रेशर वालों को कौन सी एक्सरसाइज करनी चाहिए?
हमारे आसपास ज्यादातर लोग जिन्हें हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत होती है वे लोग शारीरिक गतिविधियों पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं देते हैं उन्हें ऐसा लगता है की दवाइयों का सेवन उनके हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित कर सकता है ऐसे में वे शारीरिक गतिविधियों से दूरी बनाने लगते हैं लेकिन शारीरिक गतिविधियों से दूरी बनाना उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।
ऐसे में उन्हें नियमित रूप से मॉर्निंग वॉक, योगा इसके अलावा हल्के-फुल्के एक्सरसाइज भी करते रहना चाहिए।
जब आप का रक्तचाप अधिक होता है, तो क्या लक्षण होते हैं?
यदि आप का रक्तचाप बहुत अधिक बढ़ा हुआ है तो आपको कुछ लक्षण दिखाई दे सकते हैं। जैसे अत्यधिक थकान, सिरदर्द, कमजोरी, देखने में समस्या आदि आपको ऐसे लक्षण दिखाई देते हैं, तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें।
आप अपने रक्तचाप को तुरंत कैसे कम कर सकते हैं?
नियमित रूप से टहलने, व्यायाम वजन कम करने, सोडियम का सेवन कम करने शराब कम पीने और पोटेशियम युक्त आहार खाने से रक्तचाप की समस्या को कम किया जा सकता है।
हाई ब्लड प्रेशर का सबसे खतरनाक leval कौन सा है?
हाई ब्लड प्रेशर का सबसे खतरनाक स्तर 120 मिलीमीटर से लेकर 180 मिलीमीटर तक है। यह संख्या स्ट्रोक और हृदयाघात की समस्या को पैदा कर सकती हैं, तो बेहतर होगा कि इन्हें जल्द से जल्द कम करने का उपाय किया जाए।
क्या अधिक पानी पीकर ब्लड प्रेशर को कम किया जा सकता है?
अमेरिका में हुए एक शोध में पता चला है कि पानी में कैल्शियम और मैग्नीशियम की मात्रा पाई जाती है जिसकी मदद से हाई ब्लड प्रेशर को कम किया जा सकता है। तो इस बात से नकारा नहीं जा सकता है कि पानी पीकर ब्लड प्रेशर को कम किया जा सकता है या नहीं।
ब्लड प्रेशर किस समय ज्यादा होता है?
ब्लड प्रेशर के बढ़ने तथा घटने का एक पैटर्न होता है।रात को सोते वक्त ब्लड प्रेशर कम होता है, जगने से थोड़ी देर पहले आपका ब्लड प्रेशर बढ़ना शुरू हो जाता है, वहीं दोपहर के समय आपका ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है।
हमने अपने द्वारा लिखे हुए इस लेख में हाई ब्लड प्रेशर के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी देने की कोशिश की है, हमें उम्मीद है हमारे द्वारा लिखा हुआ यह लेख आपको पसंद आया होगा। यदि इस लेख से जुड़ा कोई भी प्रश्न आपके मन में उत्पन्न हो रहा है तो आप हमें नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में कमेंट करके जरूर बताएं हम आपकी सेवा में सदैव तत्पर है।
धन्यवाद।