आज के इस लेख में हम जानेंगे bronchitis रोग के विषय में कि यह क्या होता है? ब्रोंकाइटिस इसके लक्षण, बचाव और उपचार क्या हो सकते हैं।

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मुख्य रूप से ब्रोंकाइटिस होने की स्थिति में श्वसन नली में सूजन हो जाती है। जिसकी वजह से मरीज को फेफड़ों में हवा और ऑक्सीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है।

आमतौर पर यह समस्या अधिक धूम्रपान करने पर वायु प्रदूषण, धूल मिट्टी ,में सांस लेने की वजह से हो सकता है। जब श्वसन नलिओं की कोशिकाओं में अधिक मात्रा में प्रदूषित हो जाता है, तो नाक में मौजूद छोटे-छोटे बाल प्रदूषित पदार्थ को अंदर जाने से रोकते हैं, लेकिन कुछ समय पश्चात यह भी काम करना बंद कर देते हैं।

जिसकी वजह से श्वसन नली में अधिक बलगम भर जाता है और ब्रोंकाइटिस से पीड़ित मरीज को अक्सर गाढ़े बलगम वाली खाँसी होती है, जो पीले रंग का होता है। अधिक समस्या होने पर आपको शीघ्र ही डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

ब्रोंकाइटिस क्या है? (what is Bronchitis?)

ब्रोंकाइटिस एक श्वसन संबंधी बीमारी है, जिसमें ब्रोन्कियल ट्यूब्स मुंह नाक तथा फेफड़ों के बीच पाए जाने वाले हवा के मार्ग में सूजन आ जाती है। विशेष रूप से ब्रोंकाइटिस मे ब्रोन्कियल ट्यूब्स की लाइनिंग में सूजन आ जाती है।

यह सूजन धूम्रपान करने वालों में, धूल मे सांस लेने, वायरस वा बैक्टीरियल इन्फेक्शन के कारण हो सकती है। जब श्वसन नालियों की लाइनिंग के ऊतकों की कोशिकाएं एक निश्चित मात्रा से ज्यादा उत्तेजक हो जाती हैं, तो उनके अंदर पाए जाने वाले छोटे बाल (सिलिया) जो प्रदूषित पदार्थों को रोकने का काम करते हैं।

वह अपना काम करना बंद कर देते हैं। जिससे सांस की नली बलगम से भरकर और ज्यादा उत्तेजक हो जाती हैं। जो ब्रोंकाइटिस का कारण बनती हैं। ब्रोंकाइटिस से पीड़ित लोगों को अधिक व गाढे बलगम की खांसी होती है। अब हम इसी पर क्रम में जानेंगे की ब्रोंकाइटिस कितने प्रकार के होते हैं।

ब्रोंकाइटिस कितने प्रकार के होते है? (Types of Bronchitis?)

ब्रोंकाइटिस दो प्रकार के होते है

  1. एक्यूट ब्रोंकाइटिस
  2. क्रानिक ब्रोंकाइटिस

एक्यूट ( तीव्र ) ब्रोंकाइटिस – एक्यूट ब्रोंकाइटिस होने की स्थिति में थूक के साथ-साथ अत्यधिक खांसी होने लगती है। आमतौर पर यह समस्या बैक्टीरिया संक्रमण और प्रदूषित पर्यावरण की श्वसन नली में लगातार धुआं जाने की वजह से होता है। ऐसी स्थिति में मरीज को थोड़ा सा बुखार हो सकता है, जो कि कुछ सप्ताह तक रह सकता है।

इसके साथ- साथ फांसी भी होती है जो कई सप्ताहों तक रहती है। कई परिस्थितियों में एक्यूट ब्रोंकाइटिस के लक्षण 7 से 10 दिनों के भीतर चले जाते हैं। लेकिन इसमें होने वाली सूखी खांसी आपको कुछ सप्ताहों तक परेशान कर सकती है।

बच्चों की श्वसन नली छोटी होने की वजह से उन्हें एक्यूट ब्रोंकाइटिस होने का खतरा ज्यादा रहता है। यह समस्याएं बुजुर्गों में भी हो सकती है।

क्रानिक ( दीर्घ ) ब्रोंकाइटिस- क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस लंबे समय तक रहती है। यह एम्फीसीमा के साथ होती है, जो बाद में क्रॉनिक प्रतिरोधी श्वसन संक्रमण बन जाती है। इसमें रोगी की हालत बहुत ज्यादा गंभीर हो जाती है।

उसे शारीरिक रूप से अधिक थकावट, सांस लेने में कठिनाई महसूस होने लगती है। इसके अलावा रोगी को ऑक्सीजन की भी आवश्यकता पड़ सकती है। इसमें बुखार व खांसी 1 साल से लेकर 3 महीने तक के लिए भी हो सकती है। क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस अधिकतम सिगरेट पीने वालों में ज्यादा होती है।

ब्रोंकाइटिस रोग के लक्षण क्या है?(symptoms of Bronchitis?)

अब हम बात करेंगे ब्रोंकाइटिस के लक्षणों के बारे में जो नीचे इस प्रकार है।

  1. खांसी के साथ खून आना
  2. सीने में दर्द होना।
  3. सिर दर्द और शरीर में दर्द होना।
  4. तेज बुखार होना।
  5. नाक बंद होना या नाक बहना।
  6. आवाज में घरघराहट होना।
  7. गले में खराश व गले में तकलीफ महसूस होना।
  8. सांस लेने में तकलीफ होना।

 

यदि आपको इससे संबंधित किसी भी तरह के लक्षण दिखाई देते हैं, तो आपको इस रोग से संबंधित डॉक्टर से शीघ्र ही सलाह लेने की आवश्यकता है।

ब्रोंकाइटिस रोग के कारण क्या है? (causes of Bronchitis?)

ब्रोंकाइटिस रोग किसी एक कारण की वजह से नहीं हो सकता है। इसके कई कारण हो सकते हैं जो इस प्रकार हैं।

  1. वायरस के कारण ब्रोंकाइटिस की समस्या हो सकती है।
  2. अधिक धूम्रपान करना जैसे कि सिगरेट और बीड़ी के धुएँ का शिकार होना।
  3. बैक्टीरिया भी ब्रोंकाइटिस का कारण बनता है।
  4. औद्योगिक धुएं में रहने के कारण भी ब्रोंकाइटिस की समस्या उत्पन्न होती है।
  5. वायु में किसी चीज से एलर्जी होने के कारण ब्रोंकाइटिस की समस्या पैदा होती है।
  6. दमा या वातस्फीति के कारण ब्रोंकाइटिस होना।
  7. रसायन या विषैली गैस के संपर्क में आने के कारण ब्रोंकाइटिस की समस्या होना।

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ब्रोंकाइटिस का परीक्षण (Bronchitis test)

ब्रोंकाइटिस रोग के लक्षणों को देखकर ही इसका परीक्षण किया जा सकता है। ब्रोंकाइटिस के परीक्षण में आपको कुछ जांच करवाने की सलाह दी जाती है।

  1. लंग फंक्शन की जांच कराना।
  2. सीने का एक्सरे किया जाता है।
  3. बलगम की जांच कराई जाती है।
  4. ब्लड टेस्ट भी करवाया जा सकता है।

इन जांचों को कराने के बाद ही बताया जा सकता है, कि आप ब्रोंकाइटिस से पीड़ित हैं या नहीं इन जांचों को देखकर निष्कर्ष निकाला जाता है, कि आप ब्रोंकाइटिस से पीड़ित हैं।

ब्रोंकाइटिस का उपचार क्या है? (what is Treatment of Bronchitis?)

आमतौर पर ब्रोंकाइटिस रोग पूरी तरीके से ठीक नहीं हो सकता है, पर फिर भी हम उसके लिए कुछ उपचार करते हैं। इसके अलावा एक्यूट ब्रोंकाइटिस का कोई इलाज नहीं होता है, क्योंकि यह कुछ सप्ताह के लिए होता है।

इसके लक्षण अपने आप ही चले जाते हैं, लेकिन क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस में इलाज की जरूरत पड़ती है। डॉक्टर आपको कुछ दवाई देंगे, जिससे इसके लक्षणों को काफी हद तक का कम कर सकते हैं।

इसके अलावा आपको तरल पदार्थों का सेवन करने की सलाह दी जाती है, साथ में व्यायाम करने की भी सलाह दी जाती है।

ब्रोंकाइटिस से बचाव किस प्रकार किया जा सकता है? (Bronchitis se bachaav kis prakaar kiya ja sakta hai?)

  1. धूम्रपान से दूरी बनाए रखें।
  2. ऐसी चीजों से दूरी बनाए रखे जिससे फेफड़ों को नुकसान पहुंचे जैसे कि धूल, वायु प्रदूषण आदि।
  3. शराब का सेवन ना करें।
  4. अन्य संक्रमण व वायरस से बचने के लिए हाथों को नियमित रूप से अच्छे से धोएं।
  5. तरल पदार्थों का अधिक मात्रा में सेवन करें।
  6. पानी का अधिक सेवन करें इससे फेफड़ों में मौजूद बलगम को पतला होने में मदद मिले।
  7. नियमित रूप से व्यायाम करें।
  8. मूलिन की चाय ( एक प्रकार का औषधीय पौधा जिसकी पत्तियां रोयेदार या फूल पीले होते हैं ) इसके सेवन से श्लेष्मा झिल्ली को आराम देने और फेफड़ों से बलगम को हटाने में मदद मिलती है।
  9. सर्दी व फ्लू से बचाव करें।

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ब्रोंकाइटिस रोग में क्या खाएं? (what can take in Bronchitis?)

  1. तरल पदार्थ, हर्बल चाय व सूप का अधिक मात्रा में सेवन करें।
  2. गर्म नींबू पानी का सेवन करें।
  3. फैटी एसिड वाले खाद्य पदार्थ जैसे की मछली, अखरोट का सेवन करें इससे ब्रोंकाइटिस में होने वाली सूजन कम हो जाती हैं।
  4. ब्रोकली, गाजर का सेवन करें यह पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं।
  5. प्याज, लहसुन, अदरक का उपयोग करें इससे प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत होता है।
  6. हल्दी वाला दूध पीएं इससे गले में दर्द और खराश से राहत मिलेगी।
  7. तुलसी, लांग और काली मिर्च से बनी चाय गले की खराश को दूर करती है इसका सेवन करें।
  8. बलगम की मात्रा को घटाने के लिए जौ के गर्म सूप का सेवन भी कर सकते हैं।

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ब्रोंकाइटिस से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न 

 क्या ब्रोंकाइटिस में सेब के जूस का सेवन कर सकते हैं?

ऐसा माना जाता है, कि ब्रोंकाइटिस होने पर फलों का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि फलों की तासीर ठंडी होती है, पर ऐसा नहीं है ब्रोंकाइटिस होने पर आप सेब के जूस का सेवन कर सकते हैं, पर इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करें।

 क्या सिट्रस फलों का सेवन ब्रोंकाइटिस के रोगी के लिए अच्छा होता है?

ब्रोंकाइटिस के मरीज को सिट्रस फलों का सेवन करना चाहिए। यह उनकी सेहत के लिए अच्छा होता है, यदि आप ब्रोंकाइटिस से पीड़ित हैं और सिट्रस फलों का सेवन करना चाहते हैं, तो आप उनका सेवन नियमित से कर सकते हैं।

 क्या ब्रोंकाइटिस में संतरे का सेवन कर सकते हैं ?

हां ब्रोंकाइटिस में आप संतरे का सेवन कर सकते हैं, जैसा कि हमने ऊपर बताया है कि इसमें सिट्रस फलों का सेवन अच्छा माना जाता है, तो संतरा भी सिट्रस फलो की श्रेणी में आता है। इसलिए आप ब्रोंकाइटिस में संतरे का सेवन कर सकते हैं।

 ब्रोंकाइटिस का कारण क्या है?

ब्रोंकाइटिस का कोई एक निश्चित कारण नहीं है ब्रोंकाइटिस के अनेक कारण हैं जो इस प्रकार है
1. धूम्रपान व सिगरेट पीने करने के कारण
2. अधिक धूल मिट्टी और वायु प्रदूषण में रहने के कारण।
3. वायरस के कारण।
4. बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण।
5. दमा या वातस्फीति के कारण।

 ब्रोंकाइटिस में बाबा रामदेव का उपचार?

ब्रोंकाइटिस में आयुर्वेदिक का उपचार काफी फायदेमंद माना गया है, क्योंकि इससे काफी हद तक फायदा मिलता है, तो अब हम आपको कुछ उपचार बताएंगे। जो आप ब्रोंकाइटिस होने की स्थिति में कर सकते हैं।

  1. दूध में शहद मिलाकर पीने से ब्रोंकाइटिस से काफी हद तक राहत मिलती है। नियमित रूप से आप उपयोग का सेवन करें। इससे खांसी से तुरंत छुटकारा मिल जाएगा।
  2. एक गिलास दूध में चुटकी भर हल्दी डालकर उबालें फिर इसमें एक चम्मच देसी घी मिलाये और दिन में दो से तीन बार इस उपयोग का सेवन करें। इससे ब्रोंकाइटिस से छुटकारा मिल जाएगा।
  3. सोठ और दाल चीनी को समान मात्रा में लेकर उसका चूर्ण बना ले और एक गिलास पानी में एक चम्मच चूर्ण लेकर इसको उबाल लें और गरमा गरम ही इस मिश्रण को पीये। इससे ब्रोंकाइटिस में काफी हद तक का राहत मिलेगी।
  4. नियमित रूप से सेब का सेवन करें।
  5. आंवले के जूस के सेवन से ब्रोंकाइटिस में आराम मिलता है।
  6. अदरक के रस और शहद के सेवन से भी ब्रोंकाइटिस में आराम मिलता है। थोड़ा सा अदरक का रस और दो चम्मच शहद मिलाकर इसका सेवन करें।

आज के इस लेख के माध्यम से हमने ब्रोंकाइटिस से संबंधित पूरी जानकारी प्राप्त की यदि आप ब्रोंकाइटिस से बचना चाहते हैं, तो हमारे द्वारा बताए गए उपाय अपनाएं।

मैं उम्मीद करता हूं कि हमारे द्वारा लिखा गया यह ब्रोंकाइटिस से संबंधित लेख आपको पसंद आया होगा। अगर फिर भी ब्रोंकाइटिस से संबंधित आपके मन में कोई विचार उत्पन्न हो रहा हो तो नीचे कमेंट बॉक्स में लिखकर हमें बताएं। हम आपकी सेवा में सदैव तत्पर हैं।

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धन्यवाद। ।