पार्किंसन रोग तंत्रिका तंत्र में तेजी से फैलने वाला एक प्रकार का विकार है पार्किंसन रोग के लक्षण मुख्य रूप से आपकी गतिविधियों को प्रभावित करता है यह शरीर में धीरे-धीरे विकसित होता है इसकी शुरुआत हाथों में कंपन से होती है लेकिन जब कंपकपी पार्किंसन रोग का प्रमुख संकेत बन जाता है तो यह विकार शरीर में अकड़न और धीमी गतिविधियों का मुख्य कारण बनता है।
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पार्किंसन रोग के शुरुआती दिनों में आपके चेहरे के हाव भाव में कमी देखने को मिलती है कंधे हिलना बंद कर देते हैं आवाज धीमी व अस्पष्ट हो सकती है लेकिन समय के साथ-साथ पार्किंसन रोग की समस्याएं और भी गंभीर हो सकती है।
आमतौर पर या समस्या 60 वर्ष से अधिक उम्र वाले व्यक्ति को होती है लेकिन अब इसकी चपेट में प्रौढ़ व्यक्ति (Adult) भी आने लगे है।
fitdumbbell.com‘जर्नल ऑफ न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी एंड साइकिएट्री’ के अनुसार महिलाओं की तुलना में पुरुषों को इस बीमारी से ग्रस्त होने की आशंका 1.5 गुना ज्यादा होती है। इसका कारण है महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्रावित होना है। इसी वजह से महिलाओं में यह बीमारी कम होती है।
जब यह रोग व्यक्ति के शरीर में प्रवेश करता है तो यह अपने आप में बहुत सारी समस्याओं को लेकर आता है अभी तक पार्किंसन रोग का मुख्य कारण ज्ञात नहीं हो पाया है इसके लिए और भी शोध की आवश्यकता है पार्किंसन रोग को पूर्णता ठीक नहीं किया जा सकता लेकिन कुछ दवाएं पार्किंसन रोग के लक्षणों में सुधार ला सकती है।
पार्किंसन रोग के लक्षण क्या होते है? (Parkinson rog ke lakshan kya hote hai?)
पार्किंसन रोग के लक्षण और उसके संकेत हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं पार्किंसन रोग के शुरुआती संकेत कम होते हैं जिसकी वजह से आसानी से किसी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित नहीं कर पाते है पार्किंसन रोग के लक्षण आपके शरीर के एक हिस्से में दिखना शुरू होता है लेकिन कुछ समय पश्चात इसके लक्षण पूरे शरीर में दिखने शुरू हो जाते हैं पार्किंसन रोग में निम्न कुछ लक्षण शामिल हो सकते हैं।
- इस बीमारी के शुरुआती लक्षण हाथ और उंगलियों के कंपन से शुरू होती है आप अपने हाथ के अंगूठे को तर्जनी उंगली पर रगड़कर इसे महसूस कर सकते हैं। इस बीमारी का एक संकेत यह भी है कि आपके हाथों में हमेशा बेचैनी महसूस होगी।
- पार्किंसन रोग होने की स्थिति में हाथों के कार्य करने की गति कम हो जाती है और कंधे भी ना के बराबर हिलते हैं जिसे (ब्रैडीकाइनेसिया) कहा जाता है, पार्किंसन रोग से ग्रसित व्यक्ति को खाना खाने ,लिखने एवं अन्य कार्य को करने में दिक्कत होती है।
- साथ ही टहलने की गति कम हो जाती है इसके अलावा पार्किंसन रोग से ग्रसित व्यक्ति को बिस्तर या कुर्सी से उठने में काफी तकलीफ का सामना करना पड़ता है।
- पार्किंसन रोग होने पर शरीर की मांसपेशियां कठोर होने लगती है इससे पार्किंसन रोग से ग्रसित व्यक्ति को चलने फिरने में दर्द का सामना करना पड़ता है। पार्किंसन रोग होने पर उठने बैठने में भी विशेष तकलीफ होती है कुछ समय पश्चात बैठने का तरीका भी बदल जाता है।
- दिमाग की काम करने की क्षमता कम हो जाना (मनोभ्रंश), भूलने की बीमारी, शाम के समय भ्रम की स्थिति, सोचने और समझने में कठिनाई होने की समस्या की शुरुआत हो जाती है। चेहरे के भावों का कम होना और जबड़े में कठोरता यह भी इसके प्रमुख लक्षणों में से एक है।
- अवसाद ( depression) कब्ज़, गर्दन की जकड़न, गिरने का डर, निगलने में परेशानी, बिना इच्छा के बिना किसी वजह से लगातार किसी चीज को देखना, लार टपकना, विपरीत संवेदनशीलता में नुकसान, वजन का घटना , कुछ मामलों में इसकी समस्याएं अनुवांशिक भी हो सकती है।
पार्किंसन रोग से बचाव कैसे करें? (Parkinson rog se bachaav kaise karen?)
अभी तक पार्किंसन रोग का सटीक कारण ज्ञात नहीं हो पाया है इसलिए इसके रोकथाम के तरीकों में अभी तक रहस्य बना हुआ है लेकिन कुछ शोधों में पता चलता है कि अत्यधिक चाय कॉफी या कैफीन के सेवन से पार्किंसन के रोग को बढ़ावा मिलता है लेकिन ग्रीन टी का सेवन इसके खतरे को कम करने में सहायक होता है। पार्किंसन रोग की जांच करने के लिए वर्तमान में कोई विशेष जांच मौजूद नहीं है।
तंत्रिका तंत्र की स्थितियों को जांच करके प्रशिक्षित डॉक्टर (न्यूरोलॉजिस्ट) आपके चिकित्सा इतिहास ,लक्षणों और संकेतों को देख कर आपके शारीरिक परीक्षण के आधार पर आपका इलाज कर सकते हैं। जांच के साथ-साथ डॉक्टर आपको पार्किंसन रोग से जुड़ी कुछ दवाएं भी दे सकते है।
पार्किंसन रोग के उपचार क्या हो सकते हैं? (Parkinson rog ke upachar kya ho sakate hai?)
पार्किंसन रोग को पूर्णता ठीक नहीं किया जा सकता लेकिन नियमित दवाओं के माध्यम से इसके लक्षण पर नियंत्रण किया जा सकता है कुछ गंभीर मामलों में इसके सर्जरी की सलाह भी दी जाती है। पार्किंसन रोग से संबंधित डॉक्टर आपको अपने जीवन शैली में बदलाव लाने को कहते हैं जैसे एरोबिक, व्यायाम ,योगा आदि।
पार्किंसन रोगियों को दी जाने वाली दवाएं दिमाग में डोपामाइन के स्तर को बढ़ाने का कार्य करता है जिससे उनकी चाल व कंपन से जुड़ी समस्याएं कम हो सकती हैं लेकिन डोपामाइन सीधा-सीधा आपके दिमाग को नहीं दिया जाता क्योंकि यह आपके दिमाग में प्रवेश नहीं कर सकता है।
पार्किंसन रोग का सही उपचार होने के बाद इसके लक्षणों में कुछ हद तक काबू पाया जा सकता है। लेकिन इसके लिए रोगियों को समय पर दवाइयां और योग करने की आवश्यकता है।
डीप ब्रेन स्टीमुलेशन इस तकनीक को (डिबीएस) भी कहा जाता है जो पार्किंसन रोग के इलाज में एक बेहतर विकल्प माना गया है इस तकनीक के अंतर्गत मरीज के दिमाग के कुछ भागों को लीड के माध्यम से तरंगित किया जाता है यह लीड पेसमेकर से जुड़ी होती है जो लगातार मरीज के दिमाग की कोशिकाओं को तरंगित करने का कार्य करती है।
साथ ही यह तकनीक दिमाग की अन्य कोशिकाओं और शरीर के अंगों को नियंत्रित रखने में मदद करती है। रोगियों के दवाओं के असर कम होने या साइड इफेक्ट होने की स्थिति में डीबीएस तकनीक काफी मददगार होती है।
पार्किंसन रोगी को क्या खाना चाहिए? (Parkinson rog ko kya khana chahiye?)
पार्किंसन रोग से ग्रसित रोगियों को अपने आहार में फल, हरी सब्जियां और कम वसा वाले मीट और भरपूर विटामिन युक्त खाद्य पदार्थ लेने चाहिए इसके साथ नियमित व्ययाम,कर के वजन को नियंत्रित रखना चाहिए इसके अलावा फाइबर युक्त आहार का भी सेवन करना चाहिए।
पार्किंसन रोग से संबंधित कुछ प्रश्न एवं उनके उत्तर
पार्किंसन रोग में कौन सा योगासन लाभदायक है?
पार्किंसन रोग होने की स्थिति में रोगी को अनुलोम विलोम, ताड़ासन, पवनमुक्तासन, शवासन, आदि योग करने से पार्किंसन रोगी को राहत मिलता है।
पार्किंसन रोग के कितने स्टेज हैं?
पार्किंसन रोग के शुरुआती लक्षणों में हाथों एवं उंगलियों का हिलना लेकिन उस समय पश्चात यह समस्याएं और भी गंभीर हो सकती हैं।
हमने आपको अपने इस आर्टिकल के माध्यम से पार्किंसन रोग के विषय में विस्तृत रूप से जानकारी दी और यह भी जानकारी दी कि पार्किंसन रोग के लक्षण बचाव और उपचार क्या-क्या हो सकते हैं। साथ ही हमने आपको पार्किंसन रोग में खाने के बारे में भी बताया कि आप किन किन चीजों को पार्किंसन रोग के दौरान खा सकते हैं।
हमें उम्मीद है कि हमारे द्वारा पार्किंसन रोग पर लिखा हुआ या लेख आपको बेहद पसंद आया होगा यदि पार्किंसन रोग से संबंधित आपके मन में कोई प्रश्न उत्पन्न हो रहा है तो आप अवश्य ही हमें नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके जानकारी दे सकते है।
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