ट्यूबरक्लोसिस (क्षय रोग) या हिंदी भाषा में इसको टीबी के नाम से जाना जाता है। यह एक खतरनाक जानलेवा बीमारी है। हर साल पूरे विश्व में लगभग 25 लाख मौत टीबी के कारण ही होती हैं टीबी को अन्य नाम से भी जाना जाता है जैसे- राजक्षमा, तपेदिक, दंणडाणु आदि।
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टीबी माइक्रो बैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस नामक जीवाणु के माध्यम से फैलता है। पूरे विश्व में हर साल 24 मार्च को विश्व टीबी दिवस मनाया जाता है। ताकि इस बीमारी के बारे में लोगों को जागरूक किया जा सके।
आज हम आपके समक्ष ट्यूबरकुलोसिस पर आर्टिकल लेकर प्रस्तुत हुए हैं तो आज हम बात करेंगे ट्यूबरक्लोसिस क्या होता है? यह कितने प्रकार की होती है? इसके लक्षण क्या होते हैं? इसका निदान कैसे किया जा सकता है?
टीबी एक खतरनाक संक्रामक बीमारी है इसका बैक्टीरिया हवा के माध्यम से फैलता है टीबी से संक्रमित व्यक्ति से बात करने से टीबी होने की संभावना रहती है। आमतौर पर टीबी फेफड़ों में होता है लेकिन यह फेफड़ों के अलावा शरीर के अन्य हिस्सों में भी होती है।
जैसे कि हड्डी की टीबी, पेट की टीबी, दिमाग की टीबी आंतों की टीबी, गले की टीबी एवं गर्भाशय की टीबी आदि लेकिन अन्य हिस्सों की टीबी संक्रमित व्यक्ति से बात करने से खांसने से छीकने से नहीं फैलती है। टीबी का खतरा उन लोगों में ज्यादा रहता है।
जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। अगर समय रहते इस बीमारी का इलाज ना किया जाए तो यहां जानलेवा साबित हो सकती है। टीबी का जीवाणु शरीर के जिस हिस्से में प्रवेश कर जाता है उसको पूरी तरीके से नष्ट कर देता है और इस कारण उस अंग पर काफी दुष्प्रभाव पड़ते हैं।
टीबी के लक्षण ( TB ke lakshan )
- लगातार खांसी आना व खांसी के साथ बलगम की समस्या होना।
- शाम होते ही बुखार चढ़ना।
- सांस लेते समय सीने में दर्द होना।
- तेजी से वजन का कम होना।
- कभी कभी मुंह से खून आना।
- सर्दियों में भी रात में पसीना आना।
टीबी के प्रकार ( TB ke prakaar )
वैसे तो टीबी शरीर के बहुत से हिस्से को प्रभावित करती है पर हम यहां टीबी के कुछ खास प्रकारों के बारे में बात करेंगे जिन का खतरा ज्यादा रहता है।
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फेफड़ों की टीबी ( Fefdo ki TB )
फेफड़ों की टीबी सबसे खतरनाक टीबी है क्योंकि टीबी का जीवाणु सबसे पहले फेफड़ों पर ही असर करता है। फेफड़ों की टीबी होने पर सांस लेने में समस्या का होना ,चलते समय सांस का फूलने लगना खांसी आना,कमजोरी महसूस होना इस तरह के लक्षण सामान्यता देखने को मिलते हैं।
पेट की टीबी ( Pet ki TB )
टीबी का जीवाणु जब फेफड़ों से रक्त के माध्यम से पेट में पहुंच जाता है। तो पेट की टीबी की शुरुआत हो जाती है। पेट की टीबी को शुरुआत में पहचानना काफी मुश्किल होता है। क्योंकि इसके कोई खास लक्षण नहीं होते हैं जिससे आप कह सके कि उस व्यक्ति को पेट की टीबी है।
जैसे पेट में दर्द होना, दस्त आना इस तरह के लक्षण ही दिखाई देते हैं पेट की टीबी का पता तब चलता है। जब पेट में गांठें बन जाती हैं जिससे पेट की टीबी अंदर ही अंदर तकलीफ देती है।
हड्डी की टीबी ( Haddi ki TB )
फेफड़ों की टीबी का अगर समय रहते उपचार ना किया जाए तो यह हमारी हड्डियों को भी प्रभावित करती है। हड्डियों की टीबी में रीढ़ की हड्डी की टीबी सबसे प्रमुख होती है हड्डियों की टीबी होने पर हमारी हड्डियों कमजोर हो जाती है।
इसके कुछ सामान्य लक्षण जैसे हड्डियों में घाव होना,जोड़ों में दर्द, जोड़ों में सूजन, जोड़ों में जकड़न, पीठ में दर्द होना, कमर में दर्द होना, इस तरह के लक्षण दिखाई देते हैं। अगर हड्डी की टीबी का इलाज ना किया जाए तो हमारी हड्डियों को बेहद कमजोर हो जाती हैं जिसकी वजह से हम चलने फिरने में भी असमर्थ रहते हैं।
आंतों की टीबी ( Aanto ki TB )
आंतों की टीबी बहुत ही खतरनाक मानी जाती है, आंतों की टीबी का पता धीरे-धीरे बीमारी बढ़ने के साथ ही चलता है। आंतों की टीबी होने पर कब्ज का अधिक समय तक ठीक ना होने की समस्या ज्यादातर देखने को मिलती है ,बार-बार दस्त आना ,पेट में दर्द उल्टी ,मितली आना मल के साथ खून में मवाद आना जैसी गंभीर समस्याएं देखने को मिलती है।
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मस्तिष्क की टीबी ( Mastishk ki TB )
मस्तिष्क के टीबी हर उम्र व वर्ग के लोगों को प्रभावित करती हैं टीबी का जीवाणु जब मस्तिष्क में पहुंच जाता है तो यहां दिमाग को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर देता है ऐसे में दौरे पड़ना, सर में दर्द होना,थकान होना ,बुखार का होना, धीरे- धीरे बीमारी बढने पर पैर की नसें सुन्न होने लगती हैं।
दिमाग की टीबी में रोगी को पैरालाइसिस का खतरा ज्यादा रहता है। दिमाग की टीबी का अगर इलाज सही समय पर ना किया जाए तो व्यक्ति कोमा में भी जा सकता है।
गर्भाशय की टीबी ( Garbhashay ki TB )
गर्भाशय की टीबी महिलाओं को माँ बनने के सुख से वंचित कर सकती है। क्योंकि गर्भाशय की टीबी होने पर बांझपन का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। गर्भाशय की टीबी को साइलेंट ट्यूबरक्लोसिस भी कहा जाता है। इस बीमारी का पता लगाना बहुत ही मुश्किल होता है।
गर्भाशय में टीबी होने पर सबसे पहला लक्षण अनियमित महावारी का होना होता है इसके अलावा योनि स्राव पेट संबंधी दर्द ,हल्का बुखार यौन संबंधों के बाद दर्द आदि लक्षण दिखाई देते हैं।
गले की टीबी (Gale ki TB )
गले की टीबी भी एक खतरनाक रूप की बीमारी है। गले की टीबी के लक्षण धीरे धीरे दिखाई देते हैं। गले की टीबी होने पर गले में गिल्टी होना, आवाज में भारीपन आ जाना ,खाने पीने में तकलीफ होना की समस्या देखने को मिलती है।
टीबी की पहचान कैसे करें ( TB ki pahechan kaise kare )
अलग अलग टीबी के अलग-अलग टेस्ट होते हैं सबसे पहले फेफड़ों की टीबी का पता लगाने के लिए सीने का एक्सरे कराया जाता है। अगर इससे कोई हल नहीं निकलता है तो बलगम की जांच कराई जाती है जो 2 दिन तक होती है इसमें फेफड़ों की टीबी का पता चल जाता है।
इसके अलावा स्किन टेस्ट से भी टीबी का पता लगाया जा सकता है हड्डियों की टीबी का पता करने के लिए हड्डियों का एक्स-रे कराया जाता है। मस्तिष्क की टीबी की पहचान मस्तिष्क का एमआरआई व सिटी स्कैन के द्वारा किया जाता है। पेट की टीबी की पहचान के लिए पेट का अल्ट्रासाउंड व पेट की एम आर आई की जाती है।
गर्भाशय की टीबी की पहचान के लिए सर्वाइकल स्वैब लेकर उसका टेस्ट किया जाता है गले की टीबी की जांच के लिए एंडोस्कोपी की जाती है और ब्लड से भी टीबी का पता किया जा सकता है।
टीबी का इलाज ( TB ka ilaaz )
टीबी का इलाज पूरी तरीके से संभव है जिन लोगों में टीबी का बैक्टीरिया पाया जाता है उनको एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं। टीबी का इलाज उसकी स्थिति के अनुसार किया जाता है।
इसका इलाज काफी लंबा होता है कम से कम 6 से 8 महीने व ज्यादा से ज्यादा 2 साल तक दवाइयों का सेवन किया जाता है। अगर बीच में दवाएं छोड़ दी जाए तो यहां हमारी लिए जानलेवा साबित हो सकती है, क्योंकि दोबारा बैक्टीरिया पनपने से दवाओं के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है।
जिससे व्यक्ति की मृत्यु भी हो जाती है टीबी का इलाज शुरू होते ही शुरुआत के 2 महीने के अंदर इंफेक्शन होने का खतरा भी रहता है। इससे हमारे इलाज के शुरुआती दौर में त्वचा पर लाल चकत्ते होना, खुजली होना, मतली, उलटी होना इस तरह का इंफेक्शन देखने को मिलते हैं।
टीबी से बचाव कैसे किया जाए ( TB se bachaav kaise kiya jaaye )
टीबी से बचाव के लिए आपको संक्रमित व्यक्ति से दूर रहना चाहिए, ज्यादा भीड़ भाड़ वाले इलाके में मुंह पर मास्क लगाकर जाना चाहिए, टीबी से बचाव के लिए पौष्टिक भोजन व फल फ्रूट का सेवन करना चाहिए।
ताकि हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहे और हम इस बीमारी की चपेट में ना आये।
कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न
टीबी क्या है ?
टीबी एक खतरनाक संक्रामक रोग है जिसके बैक्टीरिया हवा के माध्यम से फैलता है। यह बीमारी संक्रमित व्यक्ति से बात करने उसके खासने और छिकने से भी फैलता है।
टीबी में बुखार आने पर रोगी को कौन सी दवा दें ?
टीबी में बुखार आना आम बात है पर टीबी में बुखार आने पर डॉक्टर के परामर्श के अनुसार ही दवा लेनी चाहिए। हम आपको इस लेख के माध्यम से टीबी की पूरी जानकारी दे सकते हैं किए क्या होता है इस समस्या से निजात पाने के लिए आप क्या कर सकते हैं। इस समस्या के लक्षण क्या होते हैं, लेकिन दवा की कोई जानकारी नहीं दे सकते हैं इसलिए आप डॉक्टर से सलाह लेकर ही दवा का सेवन करें।
क्या lungs इन्फेक्शन या ट्यूबरक्लोसिस में पेट फूलने की समस्या होती है ?
लंग्स इनफेक्शन या ट्यूबरक्लोसिस में पेट फूलने जैसी कोई समस्या देखने को अभी तक नहीं मिली है। इस चीज पर अभी तक कोई भी रिसर्च भी नहीं हुई है अगर फिर भी आपके साथ ऐसी समस्या देखने को मिल रही है तो रहा है तो आप डॉक्टर के परामर्श के अनुसार चेकअप करवाएं।
आज हमने जाना ट्यूबरक्लोसिस क्या होता है, टीबी जैसी खतरनाक बीमारी के बारे में विस्तृत रूप से जाना और टीबी के कुछ प्रकार जाने और यह भी जाना कि टीबी का पता कैसे लगाएं और टीबी का इलाज के बारे में भी जाना, उनसे बचाव के तरीके भी जाना टीबी से संबंधित और किसी प्रकार की जानकारी प्राप्त करने के लिए आप हमें कमेंट बॉक्स में कमेंट कर के पूछ सकते हैं। हम आपके लिए सदैव तत्पर है।
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धन्यवाद।।