आज हम आपको अपने इस आर्टिकल के माध्यम से चमकी बुखार के बारे में विस्तृत रुप जानकारी देंगे साथ ही इसके लक्षण, बचाव एवं उपचार के बारे में बताएंगे। चमकी बुखार को अंग्रेजी में (एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम) या दिमागी बुखार भी कहा जाता है।
fitdumbbell हेल्थ कम्युनिटी से जुड़ने और हेल्थ रिलेटेड अपने सवाल पूछने के लिए यहां क्लिक करें।
जिसकी वजह से हाल में ही में करीब 120 बच्चों की मौत हो गयी वर्ष 2014 में भी 139 बच्चों की मौत हुई थी और वर्ष 2012 में इस बीमारी की वजह से 178 बच्चों की मौत हो गई।
इसमें ज्यादातर बच्चों की मौतें (हाइपोग्लाइसीमिया )शरीर में लो ब्लड शुगर के कारण हुआ है। सामान्यता हाइपोग्लाइसीमिया दिमागी बुखार से पीड़ित मरीजों में दिखते हैं। कई सालों तक हुए शोध के बाद इन दोनों के बीच संबंध स्थापित किया गया है। दरअसल इस दिमागी बुखार का दायरा काफी बढा हुआ है। इसमें अनेकों प्रकार के संक्रमण होते हैं। मुख्य रूप से यह सिंड्रोम वायरस बैक्टीरिया और फंगस की वजह से हो सकता है।
सामान्य तौर पर भारत में जो वायरस पाया जाता है। उसे जापानी इंसेफेलाइटिस या दिमागी बुखार कहते हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुमान के अनुसार भारत में 5 से 35% तक जापानी बुखार वायरस की वजह से होता है।
खास तौर पर यह बीमारी भीषण गर्मी के मौसम में होती है खासकर यह नवजात शिशु से लेकर 15 वर्ष के बच्चों को अपने चपेट में लेता है। जो बच्चे पूर्णता कुपोषण के शिकार होते हैं।
कई मामलों में चमकी के बुखार का मुख्य कारण लीची को भी बताया गया है परंतु चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा कोई ठोस कारण नहीं ढूंढ पाया गया है। चमकी के बुखार से प्रभावित बच्चों के शरीर में शुगर और सोडियम का स्तर काफी कम हो जाता है।
चमकी बुखार (एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम) का कारण क्या है?
दिमागी बुखार होने की वजह से खासकर या बच्चों को अपनी चपेट में लेता है। दिमाग की कोशिकाओं और तंत्रिकाओं में सूजन की वजह से दिमागी बुखार होता है। दिमाग का बुखार संक्रामक नहीं होता है परंतु बुखार पैदा करने वाला वायरस संक्रमण हो सकता है।
एक्यूट इंसेफलाइटिस का मुख्य कारण जापानी वायरस को माना जाता है। इनमें से कुछ वायरस के नाम निम्नलिखित हैं जैसे- हर्पीस वायरस,ऐंट्रोवायरस वेस्ट नाइल ,जापानी इंसेफ्लाइटिस आदि प्रमुख हैं। परंतु भारत में एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम को जापानी वायरस का प्रमुख कारण माना जाता है। तो आइए जानते हैं इन संक्रमण के बारे में विस्तार से।
हर्पीस वायरस (Herpes virus)
हर्पीस वायरस एचएसवी(herpes simplex virus) की वजह से होने वाला एक संक्रमण है। यह संक्रमण शरीर के बाहरी हिस्सों में फैलता है जैसे- गुप्तांग, गुर्दा का क्षेत्र, त्वचा आदि को विशेषकर प्रभावित करता है। हर्पीस एक लंबे समय तक रहने वाला संक्रमण है कुछ लोगों को इसके लक्षण आसानी से नहीं दिखाई पड़ते है जबकि वे इसे प्रभावित कर रहे होते हैं हर्पीस के सामान्य लक्षण है जैसे- छाले अल्सर, पेशाब करते वक्त दर्द होना, हर्पीस को दवाओं और घरेलू उपचार के माध्यम से ठीक किया जा सकता है।

fitdumbbell.com
हर्पीस के घरेलू उपचार
- हर्पीस होने की स्थिति में गर्म पानी से नहाए साथ ही नहाते वक्त डिटॉल वगैरह का इस्तेमाल अवश्य करें।
- साथ ही हर्पीस से प्रभावित अंग को साफ और सूखा रखें। प्रभावित अंगों को आरामदायक रखने के लिए ढीले ढाले वस्त्र का उपयोग करें।
- कोशिश करें कि नमक पानी में मिला कर नहाएं इससे हर्पीस के दौरान होने वाले दर्द से राहत मिलता है।
- प्रभावित क्षेत्र में नियमित रूप से पेट्रोलियम जेली लगाएं।
- यौन क्रिया की गतिविधियों से बचें जब तक कि यह समस्या ठीक ना हो जाए।
- पेशाब करने में अत्यधिक दर्द हो रहा हो तो पेशाब मार्ग पर पेट्रोलियम जेली का उपयोग करें।
ऐंट्रोवायरस (Intero virus)
(सीडीसी )के रिपोर्ट के अनुसार 40 से ज्यादा देशों में ऐंट्रोवायरस के मामले सामने आए हैं की यह व्यक्ति के नजदीक से संपर्क में आने से फैलता है और ज्यादातर बच्चे ही एंट्रोवायरस के शिकार होते हैं। एंट्रोवायरस एक छोटे वायरस होते है जो (आएनए) और प्रोटीन से मिलकर बने होते हैं। यह तीन विभिन्न पोलियोवायरस के साथ कई नॉन पोलियो वायरस से मिलकर बने होते है।
जो इंसानों के शरीर में बीमारियां पैदा करते है। और या सीधा सीधा नर्वस सिस्टम पर हमला करता है। ऐंट्रोवायरस डी 68 ने बहुत सारे बच्चों को अपना शिकार बनाया है। मुख्य रूप से या वायरस संक्रमित व्यक्ति को छूने से फैलता है।

fitdumbbell.com
ऐंट्रोवायरस से बचाव कैसे करें
- बच्चों को खाना खिलाने से पहले उनके हाथ अवश्य धुलाये।
- जो भी बच्चे इस वायरल संक्रमण से ग्रसित हैं उन्हें चूमने या फिर गले लगाने से बचें।
- यदि आपका बच्चा इस बीमारी से पीड़ित है तो उसे पीठ की तरफ मुंह करके खाँसने को कहें।
- यदि आपका बच्चा इस बीमारी से संक्रमित है तो उसे ज्यादा से ज्यादा घरों में ही रखें।
इसे भी पढ़े-जाने सबसे अच्छे मल्टी विटामिन (Multi Vitamin Becadexamin) के बारे में
वेस्ट नाइल वायरस (west nile virus)
वेस्ट नाइल का वायरस क्यूलेक्स मच्छर के काटने की वजह से फैलता है। जो गर्मियों में अत्यधिक सक्रिय रहता है, भारत के राष्ट्रीय स्वास्थ्य पोर्टल (एनएचपीआई) के अनुसार केरल में वर्ष 2011 में इसके अधिक मामले सामने आए। साथ ही इसके नमूनों में वेस्ट नाइल वायरस की उपस्थिति पाई गई। यह संक्रमण मच्छरों द्वारा गर्मियों में काफी तेजी से फैलता है।
(हेल्थ केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया) के अध्यक्ष का भी कहना है कि गर्मियों के मौसम में वेस्ट नाइल वायरस काफी तेजी से फैलता है। इससे संक्रमण फैलने का खतरा काफी बढ़ जाता है इसलिए सावधानी बरतनी चाहिए इससे मनुष्य एवं अन्य स्तनधारी भी संक्रमित हो सकते हैं। यह वायरस खून तथा उतको के संपर्क में आने से फैल सकता है। वेस्ट नाइल फीवर के प्रारंभिक है बुखार सिरदर्द थकान शरीर में दर्द मितली उल्टी त्वचा पर चकत्ते लिम्प ग्रंथियों में सूजन आदि।

fitdumbbell.com
वेस्ट नाइल संक्रमण के बचाव
- क्यूलेक्स मच्छर गमले ,पानी की टंकी ,या फिर कूलर में अंडे दे सकते हैं यदि इस संक्रमण से बचना चाहते हैं तो इसे समय समय पर साफ करते रहें और अपने आसपास किसी भी प्रकार की गंदगी या पानी को जमने ना दें।
- रात को सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग अवश्य करें।
- पूरे बाजू की शर्ट और पैंट पहनने से क्यूलेक्स मच्छरों के काटने से बचा जा सकता है।
चमकी बुखार के लक्षण (एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम )

fitdumbbell.com
यदि समय रहते ही इस बीमारी का इलाज न किया जाए तो यह मरीज के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। इसी क्रम में हम आपको बताएंगे की चमकी बुखार के लक्षणों के बारे में जिसका पता चलते ही आप शीघ्र ही इसके उपचार करवाएं।
जैसा कि हमने ऊपर की पंक्तियों में जिक्र किया है यह बीमारी बच्चों में काफी तेजी से फैलती है। ऐसी स्थिति में बच्चों का शरीर ऐठने लगता है और दांतो पर दाँत चढ़ने लगता है। शरीर में अत्यधिक कमजोरी के कारण बच्चा बार बार बेहोश होने लगता है। शरीर में कंपन के साथ साथ बार-बार झटकेे भी लगते रहते हैं कई बार तो बच्चों का शरीर पूर्ण रूप से सुन्न भी पड़ जाता है।
- चमकी बुखार होने की स्थिति में बच्चों को लगातार तेज बुखार, बदन दर्द और ऐंठन की समस्या हो जाती है।
- कमजोरी की वजह से बच्चा लगातार बेहोश होने लगता है साथ ही उसका शरीर भी सुनने पड़ने लगता है।
- अधिकतर बच्चों को मानसिक भटकाव महसूस होता है।
- ज्यादातर बच्चे घबरा जाते हैं।
चमकी बुखार होने पर क्या क्या बचाव करें
- तेज बुखार होने पर बच्चों के सिर को ठंडे पानी से पोछे जिससे उनके सिर पर बुखार ना चढ़ने पाए।
- डॉक्टर की सलाह अनुसार ही उसे पेरासिटामोल टेबलेट या सिरप दें।
- बच्चे को O.R.S का घोल पिलाए परंतु ध्यान रहे इस घोल का इस्तेमाल 24 घंटे बाद ना करें।
- चमकी बुखार आने की स्थिति में बच्चे को अस्पताल ले जाएं और उसे दाएं या बाएं करवट लिटाये ।
- बच्चे को गर्म स्थान पर या धूप में जाने से रोकें।
- बुखार आने की स्थिति में बच्चे के गर्दन को सीधा रखें।
- बच्चे को संतुलित एवं पोषक आहार खिलाएं और पानी की कमी ना होने दें।
जापानी इंसेफ्लाइटिस (Japanese encephalitis)

fitdumbbell.com
जापानी इंसेफेलाइटिस के प्रकार का वायरल संक्रमण है जो मस्तिष्क में सूजन के कारण होता है यह वायरस भी संक्रमित मच्छर के काटने से फैलता है,आमतौर पर यह समस्याएं एशियाई देशों में अधिक देखने को मिलती है।
ज्यादातर ग्रामीण व कृषि क्षेत्र के लोग इस बीमारी से पीड़ित होते हैं।जापानी इंसेफेलाइटिस होने की स्थिति में आपको सिर दर्द, तेज बुखार ,उल्टी, दौरे आदि पर सकते है। यदि आप बार-बार ऐसे लक्षणों का अनुभव करते हैं तो आपको डॉक्टर से परामर्श लेने की आवश्यकता है।
अब जापानी इंसेफेलाइटिस के विरुद्ध लोगों में जागरूकता फैल गई है और अस्पतालों में इस वायरस को ठीक करने के टिका मौजूद है। यदि आपको ऐसा लगता है कि आप जिस जगह पर जा रहे हैं वहां आपके बच्चों को जापानी इंसेफेलाइटिस होने की संभावना है तो जाने से पहले ही अपने बच्चों को जापानी इंसेफेलाइटिस का टीका अवश्य लगवाएं।
चमकी बुखार होने की स्थिति क्या उपचार करें
- बच्चे को लीची का सेवन बिलकुल भी ना कराएं क्योंकि इस संक्रमण के फैलने का सबसे बड़ा कारण लीची हो सकता है ।
- बच्चे को बिल्कुल भी गर्म कपड़े ना पहना और उसे बिल्कुल ठंडी जगह पर रखें।
- चमकी बुखार से ग्रसित बच्चों के साथ उसके बिस्तर पर ना बैठें इससे संक्रमण तेजी से फैलता है।
- मरीज के साथ अस्पताल में रहने के दौरान उसे बेवजह तंग ना करें और आसपास शोर बिल्कुल भी करें।
चमकी बुखार होने की स्थिति में डॉक्टर शीघ्र ही एमआरआई या फिर सीटी स्कैन की सलाह देते हैं साथ ही चमकी बुखार को पहचानने के लिए यूरिन और ब्लड की भी जांच कराई जाती है यदि बच्चों में इसके शुरुआती लक्षण देखने को मिलते हैं तो रीढ़ की हड्डी से द्रव्य लेकर इसके जांच कराए जाते हैं।
गर्मी के मौसम में बच्चों के साथ कुछ सावधानियां बरतें
- गर्मी के मौसम में बच्चों को ताज़ा फल,सब्जी का कराएं नहीं तो इससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
- घरों में या घरों के आसपास गंदगी को ना पनपने दें इससे बच्चों में संक्रमण तेजी से फैलता है।
- खाना खाने से पहले हाथ अवश्य धुलवाए।
- बच्चों के नाखून को बढ़ने ना दें।
- गर्मी के मौसम में बच्चों को धूप में खेलने से मना करें इससे संक्रमण तेजी से फैलता है।
- रात में बच्चों को अवश्य ही खाना खिला कर सुलाएं।
ज्यादातर बच्चे ही क्यों होते हैं चमकी बुखार के शिकार
ज्यादातर बच्चे ही चमकी बुखार अर्थात दिमागी बुखार के शिकार होते हैं ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बच्चों के शरीर की इम्युनिटी कम होती है, जिसकी वजह से उनका शरीर धूप को झेल नहीं पाता है। जिसकी वजह से बच्चों के शरीर में पानी की कमी हो जाती है और वे जल्द ही हाइपोग्लाइसीमिया के शिकार हो जाते हैं और बच्चों के शरीर में सोडियम की कमी हो जाती है। जिसकी वजह से उन्हें चमकी बुखार हो जाता है।
हमने आपको अपनी इस आर्टिकल के माध्यम से चमकी बुखार जिसे अंग्रेजी में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम कहा जाता है उसके बारे में जानकारी दी है इसका प्रकोप कुछ दिनों पहले काफी तेजी से फैल रहा था। साथ ही इसके लक्षण, बचाव, एवं उपचार की भी जानकारी दी है ऐसी स्थिति में मरीज के साथ क्या-क्या सावधानियां बरतनी चाहिए इसके विषय में भी हमने आपको बताया है।
हमें उम्मीद है कि हमारे द्वारा लिखा हुआ चमकी बुखार (एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम) पर या लेख आप सभी को पसंद आया होगा इस लेख से संबंधित आपके मन में कोई विचार उत्पन्न हो रहा है तो आप अवश्य ही हमें कमेंट करके बताएं।
fitdumbbell हेल्थ कम्युनिटी से जुड़ने और हेल्थ रिलेटेड अपने सवाल पूछने के लिए यहां क्लिक करें।
धन्यवाद।।