आज के इस लेख में हम बात करेंगे की गर्मी के दिनों के बारे में गर्मी की शुरुआत होते ही हमारे शरीर में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। गर्मी का मौसम अधिक धूप, उमस, चिपचिपाहट से भरा होता है जिसके कारण गर्मी के दिनों में वातावरण में अनेकों प्रकार के संक्रमण तेजी से बढ़ने लगते हैं।
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वैसे तो गर्मी में कुछ बीमारियां आम होती हैं पर कुछ बीमारियां इतनी गंभीर होती है कि अगर समय पर उपचार न किया जाए तो ये बीमारियां घातक साबित होती हैं। गर्मी के शुरुआत के दिनों से ही हमें ज्यादा मात्रा में पानी पीना चाहिए साथ ही हमे अपने खानपान की स्वच्छता का खासकर ध्यान देना चाहिए।
तो आइए जानते है गर्मी के प्रभाव से हमें कौन -कौन सी बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है।
टाइफाइड ( Typhoid )
वैसे तो हर मौसम में टाइफाइड का खतरा रहता है। गर्मी के मौसम में इसका खतरा अधिक हो जाता है क्योंकि गर्मी में खानपान की स्वच्छता ही इस बीमारी का सबसे बड़ा कारण है। अधिकतर लोग इसे आम बुखार समझकर ही नजरअंदाज कर देते हैं जिसके कारण यह बीमारी गंभीर बन जाती है इसमें लगातार बुखार आना, भूख कम लगना, उल्टी होना, खांसी जुकाम ,आदि लक्षण दिखाई देते हैं। इससे बचने के लिए गंदा पानी व गंदे खाने से परहेज करें, जंक फूड से दूरी बनाए रखें। इससे बचने के लिए टीकाकरण भी करवा सकते है।
खसरा ( Khasra )
गर्मियों में संक्रमण फैलने का खतरा अधिक रहता है यह बीमारी सांस के माध्यम से फैलती है अधिकतर खसरा गर्मियों में ही होता है खसरा के लक्षणों में शरीर में लाल रंग के दाने होने लगते हैं तथा साथ ही तेज बुखार, आंखों का लाल होना, नाक बहना, खांसी जुकाम इस तरह के लक्षण भी दिखाई देते हैं खसरे से संक्रमित व्यक्ति से एहतियात बरतने की जरूरत होती है इससे बचाव का एकमात्र उपाय टीकाकरण है। छोटे बच्चों में खसरा का संक्रमण फैलने की संभावना ज्यादा होती है, टीकाकरण के द्वारा उनका इस रोग से बचाव किया जा सकता है।
पीलिया ( Piliya )
पीलिया को हेपेटाइटिस ए भी कहते हैं अक्सर देखा गया है कि गर्मी का मौसम आते ही लोग पीलिया रोग से ग्रसित हो जाते है। शरीर पीला पड़ना, आंख का सफेद भाग पीला होना, नाखूनों का पीला होना, पेशाब का रंग पीला होना ,भूख कम लगना, जी मिचलाना, उबकाई आना, उल्टी होना, इस तरह के लक्षण पीलिया में देखने को मिलते हैं यह लक्षण इसलिए नजर आते हैं क्योंकि पीलिया होने पर हमारे शरीर में खून की कमी हो जाती है और हमारा पाचन तंत्र भी कमजोर हो जाता है। पीलिया होने पर रोगी को कमजोरी व नीद कमी हो जाती है। जब यह रोग पुराना हो जाता है तो शरीर में खुजली होने लगती है। इससे बचाव के लिए पानी को उबालकर या फिल्टर किया हुआ ही पीना चाहिए हो सके तो रोगी को उबला हुआ खाना ही खिलाए, और ज्यादा से ज्यादा आराम करना चाहिए। टाइफाइड से बचने के लिए टीकाकरण भी करवा सकते हैं
चेचक ( Chechak )
इसको छोटी माता भी कहते हैं। यहां बैक्टीरिया वेरीओला जोस्टर वायरस के माध्यम से फैलता है।यहां बीमारी गर्मी के शुरुआत में शुरू होती है क्योंकि वातावरण में नमी बढ़ने के साथ-साथ ही संक्रमण तेजी से फैलता है। इससे लोगों में चेचक होने का खतरा बढ़ जाता है। चेचक होने पर पूरे शरीर पर लाल रंग के दाग पड़ जाते हैं, इसके शुरुआती लक्षणों में गले में खराश होने लगती है, बुखार आना, सिर दर्द होना इसके अलावा रोगी को छींके और खांसी भी आने लगती है जिसके कारण यह रोग दूसरों में भी फैल सकता है । इससे बचाव के लिए टीका लगवाए, खान-पान पर ध्यान दें, बाहर से घर आने पर हाथ पैरों को अच्छे से धोएं और संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाए रखें
लू लगना ( Loo lagna )
गर्मियों के मौसम में जब हमारे शरीर पर तेज धूप लगती है तो लू लगने का खतरा ज्यादा रहता है। लू लगना गर्मियों के मौसम की सबसे आम बीमारी है। शरीर पर तेज धूप का लगना शरीर में नमक व पानी की कमी हो जाती है, क्योकि पसीने के तौर पर सारा पानी शरीर से निकल जाता है। इससे हमारे शरीर का बड़ा हिस्सा नमक व पानी के रूप में निकल कर हमारे शरीर में खून की गर्मी को बढ़ा देते हैं। जिससे हम लोग लू की चपेट में आ जाते हैं। लू लग जाने पर तेज बुखार, सर में भारीपन, उल्टी, चक्कर आना, बेहोशी, मांसपेशियों में कमजोरी, जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। हमको लू से बचने के लिए धूप वाला चश्मा लगाना चाहिए, सर व कान को बांधकर रखना चाहिए,चेहरे पर सनस्क्रीन लोशन लगाना चाहिए, कच्चे आम का पन्ना पीते रहे, हल्का खाना खाएं, पानी का सेवन करते रहे, हल्के सूती कपड़े पहने और फलों का सेवन करना ना भूले।
घेंघा ( Ghengha )
गर्मी का मौसम आते ही अक्सर लोगों ने देखा की समस्या देखने को मिलती है यहां समस्या थायराइड ग्लैंड के बढ़ जाने से होती है इस रोग में गर्दन में सूजन आ जाती है सांस लेने में दिक्कत होना खांसी आना निगलने में कठिनाई होना गला बैठना इस तरह की दिक्कतें होती है अगर आपको इस तरह का का कोई अच्छा दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें घेंघा से पीड़ित व्यक्ति को दवाइयां भी दी जाती है और जरूरत पड़ती है तो ऑपरेशन भी किया जाता है।
डायरिया ( Diarrhia )
गर्मियों का मौसम आते ही डायरिया होने का खतरा अधिक बढ़ जाता है अधिक गर्मी होने पर हमारे शरीर में पानी की कमी होने लगती है जिससे हमें उल्टी और दस्त होने लगते हैं जिसके कारण शरीर में कमजोरी आ जाती है डायरिया से बचाव करने के लिए अपने शरीर में पानी की कमी ना होने दें
डिहाइड्रेशन ( Dehydration )
गर्मियों में तापमान जब चरम होता है तो सबसे बड़ी समस्या डिहाइड्रेशन की होती है,क्योंकि गर्मी आते ही हमें अधिक प्यास लगने की समस्या होती है और जब हम अपनी प्यास के मुताबिक पानी नहीं पीते हैं। हमारे शरीर के साथ- साथ हमारी स्किन भी डिहाइड्रेट हो जाती हैं, अगर आपने इसको अनदेखा किया तो आप भी इसका शिकार डिहाइड्रेट आसानी से हो सकते हैं। डिहाइड्रेशन का मतलब होता है, हमारे शरीर में पानी की कमी होना। गर्मी में यह समस्या अक्सर बहुत से लोगों में देखी जाती है। कई गिलास पानी पीने के बाद भी आपकी प्यास नहीं बुझती है। डिहाइड्रेशन होने पर जीभ सूखने लगती है, अधिक प्यास लगती है, और थकान अधिक लगती है। इससे बचने के लिए में फलों व सब्जियों का सूप पीना चाहिए , नारियल पानी का सेवन करना चाहिए, ओ.आर.एस का घोल पीना चाहिए, नींबू पानी सबसे सर्वोत्तम उपाय है।डिहाइड्रेशन के लिए और अपने आहार में पानी की मात्रा को बढ़ाने के लिए फलों का सेवन अधिक मात्रा में करें।
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फूड प्वाइजनिंग ( Food poisoning )
गर्मी शुरुआत होते ही हमारे शरीर की पाचन क्षमता कमजोर हो जाती है। गर्मियों में खाने पीने की चीजें भी जल्दी दूषित होने लगती हैं। जिसके सेवन से हम फूड प्वाइजनिंग की चपेट में आ जाते हैं और फूड प्वाइजनिंग गर्मियों में होने वाली एक समस्या है। कभी-कभी ऐसा होता है कि हमें बाहर का ही भोजन खाना पड़ता है और गर्मी के मौसम में भोजन बहुत तेजी से दूषित हो जाते है, जिससे भोजन में सूक्षम बैक्टीरिया उत्पन होते हैं इसका नतीजा यह होता है की हमें पेट सम्बन्धि समस्या होने लगती है जैसे पेट में मरोड़, उल्टी, भूख न लगना, हल्का बुखार, सर दर्द, जी मिचलाना, इसके आम लक्षण है। इसके बचाव के लिए हमें भोजन को सुरक्षित रखना चाहिए। पके हुए भोजन को, कच्चे फल व सब्जियों के पास ना रखें क्योंकि कच्चे फल व सब्जियों के बैक्टीरिया पके भोजन में पनप जाते हैं और बर्तन को बिल्कुल साफ कर के धोकर रखें। अपने हाथ को अच्छे से धोए और बाहर का खाना खाने से बचें।
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सनबर्न ( Sunburn )
गर्मियों में चिलचिलाती धूप के कारण हमारी त्वचा में नमी कम हो जाती है। जिससे हमारी त्वचा मुरझा सी जाती है। गर्मियों में धूप में निकलना हमारी मजबूरी होती है। जिससे कभी-कभी हमारी त्वचा झुलस जाती है और त्वचा पर टैनिंग होने लगती है जिसे सनबर्न कहते हैं। ऐसे में इससे बचने के लिए त्वचा की खास देखभाल करनी चाहिए। और हमेशा सन स्क्रीन का इस्तेमाल करना चाहिए।
आंखों की समस्या ( Ankho ki samasya )
गर्मियों में आंख के रोग होने की समस्या अधिक होती है । तेज धूप सीधे हमारी आंखों पर ही पड़ती है। इसलिए आंखों की बीमारी अधिक होने की सम्भावना ज्यादा रहती है।गर्मी में यहां समस्या हम उम्र व वर्ग के लोगों में देखने को मिलती है। तेज धूप व अल्ट्रावायलेट किरणें गर्म हवाओं के कारण आंखों में जलन, आंखों में लाली, आंखों में चुभन, आंखों में तेज दर्द, जैसी समस्या होने लगती है। इससे बचाव के लिए अच्छी क्वालिटी का चश्मा लगाए, सर को ढककर रखें, धूल कंकड़ व मिट्टी से आंखों को बचाएं। हरी सब्जी व फल का सेवन करें और पानी का सेवन ज्यादा करें।
एलर्जी ( Allergy )
अधिक गर्मी के कारण स्किन एलर्जी होना आम बात है।क्योंकि चिलचिलाती धूप का असर हमारी त्वचा पर ही पड़ता है और इसलिए अधिकतर लोगों में त्वचा संबंधी समस्या होने लगती हैं। जब शरीर में अधिक पसीना आता है तो हमारे शरीर में खुजली होने लगती हैं। कभी- कभी दाद व त्वचा पर लाल चकत्ते भी पड़ जाते हैं। इससे बचाव के लिए हमको धूप में निकलते समय अपनी त्वचा को ढक कर रखना चाहिए।
आज के इस लेख के माध्यम से हमने जाना कि गर्मियों में हमें किन बीमारियों का खतरा ज्यादा रहता है और उनसे बचाव के तरीके भी जाने अगर आप गर्मियों की बीमारियों से बचना चाहते हैं तो हमारे द्वारा बताए गए तरीके को अपनाएं ताकि आप भी गर्मियों की बीमारियों की चपेट से मुक्त रह सके इससे लेख संबंधित अगर आपके मन में कोई भी प्रश्न हो तो हमें नीचे कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।
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