क्यासानुर वन रोग (kyasanur forest disease) के बारे में आप सभी ने कहीं ना कहीं सुना होगा, पर आप इसके बारे में ज्यादा नहीं जानते होंगे आज हम आपको क्यासानुर रोग के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी देने के लिए उपस्थित हुए हैं। क्यासानुर रोग सबसे पहले कर्नाटक में 1957 में सुनने को मिला था।

सन 2013 में इसका मामला पहली बार सामने आया था। इस खतरनाक वायरस ने 2015 में केरल में कहर बरसाया था। उस समय लगभग  102 मामले सामने आए थे जिसमें 11 लोगों की मौत हो गई थी। हर साल की बात करें तो 400 से 500  क्यासानुर रोग के मरीज  देखने को मिलते है।

यह पहली बार बंदरों में पशु महामारी के रूप में देखने को मिला। स्थानीय स्तर पर इसे बंदर रोग या बंदर बुखार के रूप में भी जाना जाता है।

Haemaphysalis spinigera जो एक वन्य किट है इस रोग  के संचरण में वाहक की भूमिका निभाता है। हालांकि आमतौर पर इन्हें कीड़ा माना जाता है। जैसे – बिच्छू, मकड़िया और घुन।

क्यासानुर वन रोग

क्यासानुर वन रोग के लक्षण क्या है? (kyasanur van rog ke lakshan kya hai in hindi?)

  1. सर्दी लगना
  2. बुखार
  3. मांसपेशियों में दर्द
  4. उल्टी होना
  5. पेट से संबंधित समस्याएं
  6. ब्लीडिंग होना

इंसानो में कैसे फैलती है ये बीमारी? (human me kaise failti hai ye bimari in hindi?)

Haemaphysalis spinigera इतना खतरनाक वायरस है, कि इससे एक बार संक्रमित होने पैर काफी गंभीर समस्याए देखने को मिल सकती है, जो आपके जीवन के लिए काफी खतरनाक साबित हो सकता है। संक्रमित जानवरों द्वारा काटे जाने के बाद के kfdv (क्यासानुर वन रोग) के वायरस तेजी से आपके शरीर फैलते हैं। एक्सपर्ट का मानना है, कि यह वायरस इंसान से इंसान में नहीं फैलते हैं।

 भारत में क्यासानुर रोग का स्थानिक एरिया (bharat me kyasanur rog ka sthanik aria in hindi)

  • कर्नाटक
  • तमिलनाडु
  • केरल राज्य

 

क्यासानुर वन रोग से बचाव कैसे पाएं? (kyasanur van rog se bachav kaise paye in hindi?)

पीसीआर या रक्त से वायरस अलगाव द्वारा आणविक पहचान द्वारा बीमारी के प्रारंभिक चरण में निदान किया जा सकता है। बाद में, एंजाइम से जुड़े इम्युनोसोर्बेंट सेरोलॉजिक परख (एलिसा) का उपयोग करके सेरोग्लोबिक परीक्षण किया जा सकता है।

KFD के लिए एक टीका मौजूद है और इसका उपयोग भारत के स्थानिक क्षेत्रों में किया जाता है। अतिरिक्त निवारक उपायों में कीट रिपेलेंट्स और उन क्षेत्रों में सुरक्षात्मक कपड़े पहनना शामिल है

 

अगर आप इस रोग से ग्रसित हो या इसके लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो जल्द से जल्द इसके उपचार के लिए डॉक्टर से संपर्क करें, क्योंकि यह एक गंभीर बीमारी है जिसका समय से इलाज ना किया जाए तो आपकी मौत भी हो सकती है।

आशा करता हूँ आपको हमारे द्वारा क्यासानुर वन रोग पर लिखा यह लेख पसंद आया होगा। इस लेख से सम्बंधित किसी भी प्रकार की जानकारी प्राप्त  लिए आप हमें कमेंट बॉक्स में कमेंट करके जरूर बताएं।

धन्यवाद।